निर्णायक मंडल की वरिष्ठ सदस्य कवि और साहित्यकार शांति नायर (कालड़ी) ने संस्तुति में कहा कि जीवन के संघर्ष, आत्मपहचान और अदम्य जिजीविषा के एक मार्मिक दस्तावेज़ के रूप में पद्मजा की पुस्तक मैं कोई और पाठकों के समक्ष आती है। दीर्घकालीन रोगावस्था तथा मस्तिष्क -शल्यक्रियाओं की शृंखला से गुज़रने के बाद संपूर्ण स्मृतिभ्रंश और फिर अनन्तर अपनी खोई हुई स्मृति, भाषा और दैनिक जीवन की क्षमताओं को पुनः अर्जित करने का अनुभव जो इस पुस्तक में लिपिबद्ध हुआ है वह असाधारण है। निर्णायक मंडल के तीसरे सदस्य आलोचक पल्लव (दिल्ली) ने कहा कि अपनी पहली ही प्रकाशित कृति से पद्मजा ने बताया है कि निजी अनुभवों की सादगी और मार्मिकता के साथ कैसे रचा जा सकता है। निस्संदेह ऐसी कृतियों से कथेतर लेखन को हमारे समय का प्रतिनिधि रचना माध्यम माना जा सकेगा। पद्मजा जैसे युवा लेखक अनुभवों के उद्घाटन के लिए प्रचलित रूपबंधों को छोड़कर डायरी जैसी विधा को अपना रहे हैं जो निश्चय ही कथेतर की महत्ता को दर्शाता है। मूलत: जयपुर निवासी पद्मजा बाल साहित्य और फिल्म के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उनकी यह डायरी 2025 में प्रकाशित हुई थी।
डॉ अग्रवाल ने बताया कि मूलत: राजस्थान के अजमेर निवासी स्वयं प्रकाश हिंदी कथा साहित्य के क्षेत्र में मौलिक योगदान के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने ढाई सौ के आसपास कहानियाँ लिखीं और उनके पांच उपन्यास भी प्रकाशित हुए थे। इनके अतिरिक्त नाटक,रेखाचित्र, संस्मरण, निबंध और बाल साहित्य में भी अपने अवदान के लिए स्वयं प्रकाश को हिंदी संसार में जाना जाता है। उन्हें भारत सरकार की साहित्य अकादेमी सहित देश भर की विभिन्न अकादमियों और संस्थाओं से अनेक पुरस्कार और सम्मान मिले थे। उनके लेखन पर अनेक विश्वविद्यालयों में शोध कार्य हुआ है तथा उनके साहित्य के मूल्यांकन की दृष्टि से अनेक पत्रिकाओं ने विशेषांक भी प्रकाशित किए हैं। 20 जनवरी 1947 को अपने ननिहाल इंदौर में जन्मे स्वयं प्रकाश का निधन कैंसर के कारण 7 दिसम्बर 2019 को हो गया था। लम्बे समय से वे भोपाल में निवास कर रहे थे और यहाँ से निकलने वाली पत्रिकाओं 'वसुधा' तथा 'चकमक' के सम्पादन से भी जुड़े रहे। डॉ अग्रवाल ने बताया कि फरवरी में आयोज्य समारोह में लेखिका पद्मजा को सम्मान में ग्यारह हजार रुपये, प्रशस्ति पत्र और शॉल भेंट किये जाएंगे। साहित्य और लोकतान्त्रिक विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए गठित स्वयं प्रकाश स्मृति न्यास में कवि राजेश जोशी (भोपाल), आलोचक दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (जयपुर), कवि-आलोचक आशीष त्रिपाठी (बनारस), आलोचक पल्लव (दिल्ली), इंजी अंकिता सावंत (मुंबई) और अपूर्वा माथुर (दिल्ली) सदस्य हैं।

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