दिल्ली : इसरो कर्मचारी संगठनों ने निजीकरण की दिशा पर स्पष्टीकरण मांगा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

रविवार, 6 सितंबर 2026

दिल्ली : इसरो कर्मचारी संगठनों ने निजीकरण की दिशा पर स्पष्टीकरण मांगा

Isro-employee-demand-answer
नई दिल्ली । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के नौ कर्मचारी संगठनों ने अंतरिक्ष एजेंसी के अध्यक्ष वी. नारायणन को पत्र लिखकर विनिर्माण और परिचालन कार्यों को निजी संस्थाओं को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव पर आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा है। चार सितंबर को लिखे गए इस पत्र में कर्मचारी संगठनों ने इसरो की भविष्य की भूमिका के साथ-साथ मौजूदा कर्मचारियों और भविष्य में होने वाली भर्तियों पर इसके संभावित प्रभावों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पत्र में कहा गया, ‘‘ निर्धारित वाणिज्यिक गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी एक मजबूत और सार्वजनिक स्वामित्व वाले इसरो के साथ सह-अस्तित्व में हो सकती है, लेकिन बिना व्यापक चर्चा के ऐसी नीति स्वीकार नहीं की जा सकती, जो इसरो को केवल सीमित आर एंड डी (अनुसंधान एवं विकास) संस्था तक सीमित कर दे और देश के प्रक्षेपण यानों के निर्माण तथा प्रक्षेपण संबंधी बुनियादी ढांचे का संचालन सार्वजनिक क्षेत्र के हाथों से बाहर चला जाए।’’ इसने भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के अध्यक्ष पवन गोयनका द्वारा 21 अगस्त को की गई टिप्पणियों का भी हवाला दिया। इन-स्पेस, गैर-सरकारी संस्थाओं की विभिन्न अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने, सक्षम बनाने, अधिकृत करने और उनकी निगरानी करने वाली संस्था है।


 गोयनका ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कथित तौर पर कहा था, ‘‘आखिरकार इसरो कोई भी प्रक्षेपण यान नहीं बनाएगा और न ही किसी प्रक्षेपण यान का निर्माण करेगा। यह सब निजी क्षेत्र या पीएसयू द्वारा किया जाएगा।’’ कर्मचारी संगठनों का दावा है कि इन टिप्पणियों के अनुरूप अंतरिक्ष विभाग की ओर से कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं की गई है, जिसमें स्वीकृत नीति, इसके कानूनी और प्रशासनिक आधार, इसे लागू करने की समयसीमा या चरणबद्ध प्रक्रिया तथा मौजूदा कर्मचारियों और भविष्य में होने वाली सरकारी भर्तियों पर इसके प्रभाव की जानकारी दी गई हो। पत्र में कहा गया है, ‘‘इसरो द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय संपत्ति है। इसका हस्तांतरण पारदर्शी और जवाबदेह होना चाहिए तथा रणनीतिक, सुरक्षा और रोजगार संबंधी पहलुओं के अनुरूप होना चाहिए...।’’ इसमें कई अन्य चिंताएं भी उठाई हैं। इनमें यह सवाल भी शामिल है कि पीएसएलवी, एलवीएम3, एसएसएलवी और भविष्य में विकसित किए जाने वाले प्रक्षेपण यानों का डिजाइन, विकास, निर्माण, एकीकरण, परीक्षण और प्रक्षेपण आगे भी इसरो के कार्यों के रूप में जारी रहेगा या इसे बंद कर दिया जाएगा।

कोई टिप्पणी नहीं: