- श्रम कानूनों के उल्लंघन और महीनों से लंबित वेतन को लेकर म.प्र. राज्य आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने सीहोर में खोला मोर्चा
वेतन की राह ताकते कर्मचारी, आर्थिक तंगी के भंवर में घिरे परिवार
ज्ञापन पत्र के माध्यम से जिले में कार्यरत आउटसोर्स कर्मियों की प्रमुख समस्याओं को रेखांकित करते हुए बताया गया कि विभिन्न शासकीय विभागों और कार्यालयों में तैनात कर्मचारियों को महीनों तक वेतन का भुगतान नहीं किया जाता। कई-कई माह तक वेतन लंबित रहने के कारण कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है तथा उनके परिवारों को अत्यंत विकट आर्थिक कठिनाइयों और मानसिक संताप का सामना करना पड़ रहा है।संघ के जिला अध्यक्ष अरविन्द शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष आशीष सिंह सिसोदिया एवं प्रदेश महामंत्री प्रकाश पुंज चौधरी ,अरविंद शर्मा संवाद प्रभारी रत्नेश शेव, जागृति ठाकुर, प्रकाश मालवीय, भूपेंद्र वर्मा, अंतर मीणा, मोहन मेवाडा, शुभम, हरीश राठौर, सहित अन्य पदाधिकारियों का कहना है कि यदि कर्मचारियों को उनके पसीने का उचित और समयानुसार मूल्य प्राप्त नहीं होगा, तो वैधानिक व्यवस्था की सार्थकता पर प्रश्नचिह्न खड़ा होना स्वाभाविक है। संघ ने मांग की है कि आउटसोर्स व्यवस्था के नाम पर हो रहे इस शोषण को तत्काल रोका जाए तथा ठेकेदारों एजेंसियों को पाबंद कर श्रम नियमों के तहत न्यूनतम वेतन, ईपीएफ, ईएसआईसी और समय पर मानदेय का भुगतान कड़ाई से सुनिश्चित कराया जाए।
क्या है नियम
समस्त शासकीय एवं अशासकीय विभागों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों तथा निजी प्रतिष्ठानों में आउटसोर्स या ठेके कर्मियों की सुरक्षा के लिए श्रम विभाग ने विशेष निर्देश जारी किए हैं। सहायक श्रम आयुक्त ने सभी नियोजकों को निर्देशित किया है कि वे आउटसोर्स कर्मचारियों को श्रम कानूनों का लाभ प्रदान करें व निर्धारित समय पर वेतन का भुगतान करें। इसकी रिपोर्ट महीने की 7 तारीख तक कार्यालय में देनी होगी। साथ ही विभाग और आउटसोर्स ठेकेदार दोनों का पंजीयन अनिवार्य किया गया है। श्रम विभाग ने चेतावनी भी दी है कि निरीक्षण के दौरान यदि किसी भी संस्थान या ठेकेदार द्वारा नियमों का उल्लंघन पाया गया तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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