दिल्ली : ‘पिंजरे में बंद तोता कभी-कभी पिटबुल बन जाता है’ : चिदंबरम - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शनिवार, 5 सितंबर 2026

दिल्ली : ‘पिंजरे में बंद तोता कभी-कभी पिटबुल बन जाता है’ : चिदंबरम

p-chidambaram
नई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को अधिक शक्तियां और स्वायत्तता देने के विचार को खारिज करते हुए पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने शुक्रवार को कहा कि ‘‘कभी-कभी पिंजरे में बंद तोता भी पिटबुल बन जाता है’’, क्योंकि निगरानी और नियंत्रण की कमी होती है। खुफिया ब्यूरो (आईबी) के पूर्व विशेष निदेशक यशोवर्धन आजाद द्वारा लिखित पुस्तक ‘पुलिसिंग द रिपब्लिक’ के विमोचन के अवसर पर आयोजित परिचर्चा में चिदंबरम ने यह टिप्पणी की। इस परिचर्चा में पुलिस सुधारों और वर्दीधारी कर्मियों द्वारा की जाने वाली कथित ज्यादतियों पर चर्चा हुई। चिदंबरम ने सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों को अधिक शक्तियां और स्वायत्तता देने के विचार को खारिज किया। हालांकि, उन्होंने आंतरिक सुधारों की आवश्यकता से सहमति जताई। पुलिस की ज्यादतियों से जुड़े एक सवाल के जवाब में वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि पुलिस व्यवस्था में थाना प्रभारी (एसएचओ) से लेकर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तक एक पूरी पदानुक्रम व्यवस्था होती है। उन्होंने कहा, ‘‘सीबीआई में बेहतरीन अधिकारी काम करते हैं, जिनमें से ज्यादातर राज्यों से प्रतिनियुक्ति पर आते हैं। वह राज्य में एक अच्छे अधिकारी होते हैं।’’ चिदंबरम ने कहा, ‘‘वह केंद्र में आकर खराब अधिकारी क्यों बन जाते हैं? क्योंकि निगरानी और नियंत्रण की कमी होती है। पिंजरे में बंद तोता भी कभी-कभी पिटबुल बन सकता है।’’

कोई टिप्पणी नहीं: