- 4 से 6 दिसंबर तक मलेशिया में होगी वर्ल्ड कप चैंपियनशिप, 65 से 69 आयु वर्ग की 85 किलोग्राम भारवर्ग श्रेणी में उतरेंगे सीहोर के खिलाड़ी
विश्व कप से कॉमनवेल्थ तक जीत चुके हैं स्वर्ण पदक
मोहन पाराशर का खेल सफर उपलब्धियों से भरा हुआ है। उन्होंने अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और छह बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तथा पांच बार राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल किए हैं। इसके अलावा विश्व चैंपियनशिप में वे तीन स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। उनके नाम कॉमनवेल्थ प्रतियोगिताओं में दो स्वर्ण पदक और एशियन चैंपियनशिप में एक स्वर्ण पदक भी दर्ज है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनके लगातार शानदार प्रदर्शन ने न केवल उन्हें पहचान दिलाई, बल्कि सीहोर जिले को भी वेटलिफ्टिंग के क्षेत्र में गौरवान्वित किया है।
ग्रीस में 148 किलो वजन उठाकर जीता था वर्ल्ड चैंपियनशिप गोल्ड
मोहन पाराशर के खेल जीवन की उल्लेखनीय उपलब्धियों में ग्रीस में आयोजित इंटरनेशनल वर्ल्ड चैंपियनशिप में जीता गया स्वर्ण पदक भी शामिल है। उन्होंने वहां 148 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। यह प्रदर्शन उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है। अब दिसंबर में मलेशिया में होने वाली वर्ल्ड कप चैंपियनशिप के लिए वे अपनी तैयारियों में जुटने की योजना बना रहे हैं। मोहन पाराशर का कहना है कि जब तक शरीर साथ देगा, तब तक देश के लिए पदक जीतने का प्रयास जारी रहेगा। उनका यह जज्बा युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणादायी है।
1978 से 1982 तक लगातार पांच बार स्टेट चैंपियन
मोहन पाराशर ने वेटलिफ्टिंग में अपनी पहचान कम उम्र में ही बना ली थी। उन्होंने वर्ष 1978 से 1982 तक लगातार पांच बार स्टेट चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। उस दौर में उन्होंने प्रदेश स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए लगातार अपना दबदबा कायम रखा। मोहन पाराशर का वेटलिफ्टिंग से जुड़ाव करीब पांच दशक पुराना है। उन्होंने महज 13 वर्ष की उम्र में वेटलिफ्टिंग शुरू की थी। उस समय खेल सुविधाएं और संसाधन सीमित थे, लेकिन उनके अंदर खेल के प्रति जुनून और आगे बढ़ने की दृढ़ इच्छा थी। जिला स्तर से शुरू हुआ उनका सफर आगे चलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा। लगातार अभ्यास, अनुशासन और मेहनत के बल पर उन्होंने एक के बाद एक उपलब्धियां हासिल कीं। आज 66 वर्ष की उम्र में भी उनका खेल के प्रति समर्पण बरकरार है।
खिलाड़ी के साथ अब कोच की भूमिका में भी योगदान
मोहन पाराशर अब केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनके कोचिंग सेंटर में 60 से अधिक वेटलिफ्टर प्रशिक्षण ले रहे हैं। उनकी कोचिंग में आधा दर्जन से अधिक खिलाड़ियों ने नेशनल स्तर और खेलो इंडिया जैसी प्रतियोगिताओं में पदक हासिल किए हैं। वे खिलाड़ियों को केवल वजन उठाने की तकनीक ही नहीं सिखाते, बल्कि अनुशासन, फिटनेस, नियमित अभ्यास और मानसिक मजबूती पर भी विशेष ध्यान देते हैं। उनके प्रशिक्षण से कई खिलाड़ी प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा बना पांच दशक का खेल सफर
13 वर्ष की उम्र में शुरू हुआ मोहन पाराशर का वेटलिफ्टिंग सफर आज 66 वर्ष की उम्र में भी जारी है। खिलाड़ी के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां हासिल करने के बाद अब वे नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार कर रहे हैं। आगामी दिसंबर में मलेशिया में होने वाली वर्ल्ड कप चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर उनके लंबे खेल सफर में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ने जा रहा है। उनके जज्बे और निरंतर अभ्यास से यह संदेश मिलता है कि खेल में उम्र से अधिक मायने मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण का होता है।

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