विचार : मिनरल सेक्टर में प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों की नीलामी ईज ऑफ डूइंग की दिशा में राजस्थान का बढ़ता कदम - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

विचार : मिनरल सेक्टर में प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों की नीलामी ईज ऑफ डूइंग की दिशा में राजस्थान का बढ़ता कदम

Dr-rajendra-sharma
विकसित भारत 2047 और आत्म निर्भर भारत की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाते हुए राजस्थान 8 प्री-एम्बेडेड मेजर मिनरल ब्लॉकों की नीलामी कर समूचे देष में अग्रणी प्रदेश बन गया है। दरअसल मेजर मिनरल की नीलाम खानों मेंं खनन कार्य शुरु होने में ढ़ाई से तीन साल लग जाते हैं। समूचे देश के लगभग यही हालात है। इसका मुख्य कारण विभिन्न स्तर पर आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करने की लंबी प्रक्रिया है। ऐसे में केन्द्र सरकार ने माइनिंग सेक्टर में भी ईज ऑफ डूइंग पर जोर देते हुए सभी राज्यों को मेजर मिनरल ब्लॉकों के लिए जरूरी अनुमतियां प्राप्त कर नीलामी करने का आग्रह करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये। केन्द्रीय खान मंत्रालय ने एमएमडीआर एक्ट में संशोधन कर सभी राज्यों से प्राथमिकता के आधार पर पांच-पांच मेजर मिनरल ब्लॉक तैयार कर इनकी आवश्यक सभी अनुमतियां पहले से ही प्राप्त कर नीलाम करने को कहा गया ताकि नीलाम खाने जल्द परिचालन में आ सके। केन्द्र सरकार के निर्देशों के अनुसार इसके लिए प्रोजेक्ट मानिटरिंग यूनिट घोषित कर आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करने का काम उससे पूरा कराकर इसके बाद मिनरल ब्लॉकों का ऑक्शन करने पर जोर दिया गया हैं। केन्द्र सरकार के दिशा-निर्देशों के क्रम में खनिज प्रधान राज्यों ने पहल की है पर राजस्थान पहला प्रदेश है जिसने मेजर मिनरल के 8 ब्लॉक तैयार कर उनकी आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर भारत सरकार के पोर्टल पर सफलता पूर्वक नीलाम किया है। गुजरात में एक प्री-एम्बेडेड ब्लॉक की सफलता पूर्वक नीलामी की जा चुकी है।


मिनरल ब्लॉकों को शीघ्र परिचालन में लाने की दिशा में केन्द्र सरकार के निर्देशों के क्रम में राजस्थान, गुजरात, ओडीसा, मध्यप्रदेश, चण्डीगढ़ और महाराष्ट्र की राज्य सरकारों ने पहल की है। इनमें देश में 16 मिनरल ब्लॉक चिन्हित किये गय हैं जिसमें से राजस्थान में 18, मध्यप्रदेश में 12, गुजरात में 9, चण्डीगढ़ में 5, महराष्ट्र में 4 और ओडसा में एक ब्लॉक चिन्हित किया गया है। इनमें से राजस्थान के माइंस विभाग द्वारा 8 ब्लॉक और गुजरात सरकार द्वारा एक ब्लॉक की सफल नीलामी की जा चुकी है। चिन्हित अन्य ब्लॉकों के लिए नीलामी से पहले की आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करने की कार्रवाई विभिन्न चरणों में जारी है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा जो स्वयं खान मंत्री भी है के नेतृत्व में राजस्थान की पहल इस मायने मेंं महत्वपूर्ण हो जाती है कि राजस्थान में माइंस विभाग ने मिशन मोड पर कार्य करते हुए समूचे देश में प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों की नीलामी की लीड ली है।


राजस्थान में प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों की नीलामी की दिशा मेंं योजनाबद्ध तरीके से कदम बढ़ाये गये। राजस्थान में आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करने का जिम्मा राजस्थान स्टेट मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट आरएसएमईटी को पीएमयू घोषित कर आवष्यक अनुमतियां प्राप्त करने की जिम्मेदारी दी गई। राजस्थान में माइनिंग सेक्टर में आत्म निर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ते हुए अब मेजर मिनरल ब्लॉकों की नीलामी के साथ ही खानों को परिचालन में लाने पर फोकस हो गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व व मार्गदर्शन में 8 ब्लॉकों की नीलामी कर और 10 ब्लॉकों की नीलामी की तैयारी के साथ समूचे देश के सामने मेजर मिनरल के प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों की नीलामी की राह प्रशस्त की है। राजस्थान में अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम अपर्णा अरोरा द्वारा नियमित समीक्षा का ही परिणाम है कि प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों की नीलामी की दिशा में राजस्थान लीड कऱ रहा है। राजस्थान में तो चिन्हित माइनर मिनरल प्लॉटों की प्री एम्बेडेड प्लॉट तैयार कर नीलामी की कार्ययोजना है। नीलाम खानों को परिचालन में लाना इसलिए आवश्यक हो जाता है कि देरी के चलते माइनिंग सेक्टर में निवेश, रोजगार और राजस्व प्रभावित होने के साथ ही एलओई धारक को आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करने में देरी हो जाती है और खनन कार्य आरंभ नहीं हो पाता है। केन्द्र और राज्य सरकार इसके लिए गंभीर है।


प्री-एम्बेडेड का अर्थ

मिनरल ब्लॉकों की नीलामी से पहले ही आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर ब्लॉक की नीलामी करने की प्रक्रिया को प्री-एम्बेडेड कहा जाता है। इससे खनन ब्लॉक की नीलामी के बाद परिचालन में लगने वाले समय की बचत होने के साथ ही नीलामी में अधिक राजस्व, शीघ्र खनन कार्य आरंभ होने और निवेश, रोजगार और राजस्व में बढ़ोतरी संभव हो पाती है। माइनिंग सेक्टर में ईज ऑफ डूइंग की दिशा में बढ़ता कदम होगा। केन्द्र सरकार गंभीरता से प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों की नीलामी पर बल दे रही है और राज्यों को कम से कम पांच प्री-एम्बेडेड ब्लॉक तैयार कर ई-नीलामी करने पर जोर दे रही है।


मिनरल ब्लॉकों की नीलामी के बाद ली जाने वाली अनुमतियां

मिनरल ब्लॉकों की नीलामी के बाद सफल निविदादात को एलओआई जारी होने के बाद विभिन्न विभागों व मंत्रालयों से खनन कार्य आरंभ करने से पहले अनुमतियां लेनी पड़ती है-

आईबीएम-माइनिंग प्लान का अनुमोदन

वन विभाग- फारेस्ट क्लीयरेंस

पर्यावरण विभाग- टर्म ऑफ रेफरेंस (टीओआर), एंवायरमेंटल इंपेक्ट एसेसमेंट रिपोर्ट (ईआईए) व जिला कलक्टर के यहां जनसुनवाई आदि और इसके बाद सेक एवं सिया से पर्यावरण अनुमति।

प्रदूषण बोर्ड- खनन के लिए कंसेट टू ऑपरेट (सीटीओ) और कंसेट टू एस्टाबलिस (सीटीई)

राजस्व विभाग-चरागाह भूमि होने की स्थिति में राजस्व विभाग से अनुमति

विविध- अन्य आवश्यक कार्रवाई व कानूनी औपचारिकताएं

प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों की जियोलोजिकल रिपोर्ट, ब्लॉकों का सीमांकन, डीजीपीएस सर्वें सहित आवश्यक औपचारिकताएं आरएसएमईटी द्वारा आवश्यक सभी औपचारिकताएं पूरी करवाई जाती है।


माइनिंग सेक्टर में जिस तरह से आज समूचे विश्व का ध्यान है और चीन जिस तरह से वर्चस्व बनाएं हुए हैं और अमेरिका की नजर दुनिया के मिनरल क्षेत्रों में टेडी नजर है उसे देखते हुए माइनिंग सेक्टर का महत्व आज अधिक बढ़ गया है। भारत सरकार की मंशा और राजस्थान सरकार की पहल के अनुसार खनिज प्रधान राज्यों द्वारा आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर ब्लॉकों की नीलामी पर जोर दिया जाता है तो नीलामी के बात आवश्यक औपचारिकताएं कुछ ही समय में पूरी कर उत्पादक कार्य आरंभ हो सकता है और इसका परिणाम देष की इकोनोमी को बूस्ट करने के साथ ही रोजगार, निवेष और राजस्व के नए अवसर विकसित हो सकते हैं। राजस्थान को जहां इस दिशा में पहल जारी रखनी होगी वहीं अन्य प्रदेशों को भी तेजी से आगे आना होगा।






डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

स्तंभकार

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