दिल्ली : उच्च न्यायालय जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति संबंधी याचिका पर 16 अक्टूबर को करेगा सुनवाई - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026

दिल्ली : उच्च न्यायालय जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति संबंधी याचिका पर 16 अक्टूबर को करेगा सुनवाई

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नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उस जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए 16 अक्टूबर की तारीख तय की, जिसमें अधिकारियों को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने और शांतिपूर्ण आंदोलन के अधिकार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा घोषित करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने याचिकाकर्ता से उच्चतम न्यायालय में लंबित इसी तरह की याचिका की प्रति रिकॉर्ड पर पेश करने को कहा। पीठ ने कहा, ‘‘हम उच्चतम न्यायालय में दायर याचिका की प्रति देखना चाहते हैं। हम विरोधाभासी आदेश नहीं देना चाहते।’’ अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने बताया कि उच्चतम न्यायालय ने प्रदर्शन से संबंधित उसके समक्ष दायर याचिकाओं पर सुनवाई 15 अक्टूबर तक के लिए टाल दी है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन के आह्वान के बाद 10 और 11 अक्टूबर को मध्य दिल्ली में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) के अध्यक्ष विनोद जाखड़ की जनहित याचिका पर सुनवाई भी नवंबर तक के लिए टाल दी। इस याचिका में 10 अक्टूबर को प्रदर्शनकारियों पर हुए हमलों की ‘‘निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच’’ कराने का अनुरोध किया गया है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल शर्मा ने जनहित याचिका (पीआईएल) की स्वीकार्यता पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसे संबंधित नियमों का उल्लंघन करते हुए दायर किया गया है। अदालत ने केंद्र को तीन सप्ताह के भीतर अपनी प्रारंभिक आपत्तियां दाखिल करने की अनुमति दी। इस बीच, जाखड़ के वकील ने अदालत से संबंधित सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के लिए निर्देश देने का आग्रह किया। शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार की सुरक्षा का अनुरोध करने वाली याचिकाकर्ता अंशिका त्रिपाठी के वकील ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों को उनके घरों में नजरबंद किए जाने को लेकर ‘‘गंभीर चिंता’’ है। त्रिपाठी की याचिका में सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर और उसके आसपास विरोध-प्रदर्शन करने की अनुमति दे और आंदोलन के लिए अलग-अलग जगहें तय करे। याचिका में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कथित अत्याचारों की विशेष जांच टीम (एसआईटी) से जांच कराने और लोगों को उनके घरों में नजरबंद किए जाने के मामलों की पड़ताल करने का भी अनुरोध किया गया है। याचिका में निषेधाज्ञा जारी किए जाने, मध्य दिल्ली में इंटरनेट बंद किए जाने और मेट्रो स्टेशन लगातार अनावश्यक एवं असंगत तरीके से बंद रखने के साथ-साथ रेल सेवाओं पर पाबंदियां लगाने को भी चुनौती दी गई है।

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