उन्होंने दावा किया कि 27 अप्रैल से पांच जून के बीच के सीसीटीवी फुटेज में गिनती से जुड़े कर्मचारी कथित तौर पर नोटों की गड्डियां छिपाते हुए 105 बार कैमरे में दर्ज हुए। उन्होंने कहा कि खजाने की जिम्मेदारी कोषाध्यक्ष की थी और अयोध्या के कुछ संतों ने भी सवाल उठाया था कि कोषाध्यक्ष गोविंद गिरि को यह जानकारी होनी चाहिए थी कि पैसा कहां से आ रहा है और कहां जा रहा है। रमेश ने दावा किया कि इसके बावजूद सात जुलाई को गिरि ने इस "घोटाले" में चंपत राय की किसी भूमिका से इनकार किया। कांग्रेस महासचिव ने यह भी सवाल किया कि कथित चोरी में कुल कितनी धनराशि या कितना कीमती सामान गायब हुआ, इसका आंकड़ा अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? उन्होंने दावा किया कि 23 जून की प्रारंभिक रिपोर्ट में निगरानी संबंधी नियम लागू नहीं होने और कंट्रोल रूम के कई बार खाली रहने की बात सामने आई थी। रमेश ने सवाल किया कि ऐसी स्थिति में जिम्मेदारी और अन्य लोगों की संभावित भूमिका की विस्तृत जांच किए बिना जांच कैसे बंद की जा सकती है।
कांग्रेस नेता के अनुसार, 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई और अगले दिन गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन प्राथमिकी में ट्रस्ट के किसी पूर्व पदाधिकारी का नाम नहीं था। उन्होंने सवाल किया कि इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अथवा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से पूछताछ या जांच क्यों नहीं कराई गई। रमेश ने राजनीतिक कटाक्ष करते हुए कहा कि अयोध्या में भाजपा की चुनावी हार एक ‘इशारा’ थी, लेकिन पार्टी ने उससे सबक नहीं लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार से ‘‘संघ परिवार से जुड़े’’ लोगों के खिलाफ निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। कांग्रेस महासचिव ने मांग की कि राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के पूरे मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराई जाए। उन्होंने कहा कि मंदिर को मिले चढ़ावे का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए, सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए और किसी भी पदाधिकारी को जवाबदेही से नहीं बचाया जाना चाहिए।

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