श्री चिदाम्बरम का माओवादियों के सामने वार्ता का ताज़ा प्रस्ताव !! - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 4 अप्रैल 2010

श्री चिदाम्बरम का माओवादियों के सामने वार्ता का ताज़ा प्रस्ताव !!


पश्चिम बंगाल के नक्सलवाद प्रभावित इलाकों के दौरे पर गए गृह मंत्री पी चिदंबरम ने माओवादी विरोधी अभियान में सेना को शामिल किए जाने से इंकार करते हुए माओवादियों के सामने वार्ता का ताजा प्रस्ताव रखा है।
   
स्थिति की समीक्षा करने के लिए लालगढ़ की यात्रा पर गए चिदंबरम ने मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य से वार्ता के दौरान कहा कि इस संबंध में कानून और व्यवस्था बहाल करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है।
   
चिदंबरम ने नक्सलियों को कायरों की संज्ञा दी, जो जंगलों में छिपे हुए हैं। उन्होंने नक्सलियों की आलोचना करते हुए कहा कि वे पीपुल्स कमेटी अगेंस्ट पुलिस एट्रोसिटीज (पीसीपीए) की आड़ में अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। पीसीपीए ने चिदंबरम की यात्रा का विरोध करने के लिए पश्चिम मिदनापुर, पुरूलिया और बांकुरा में 24 घंटे के बंद की अपील की है।
   
प्रदेश के शीर्षस्थ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक के बाद चिदंबरम ने पत्रकारों से कहा कि, हम नक्सलियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का विचार नहीं कर रहे। नक्सलियों से मुकाबला करने के लिए केवल प्रदेश पुलिस, प्रदेश सशस्त्र पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया जाएगा।

चिदंबरम ने कहा कि नक्सली कायर हैं। वे जंगलों में क्यों छिपे हुए हैं, हमने उन्हें वार्ता के लिए न्यौता दिया, लेकिन इसके पहले वे हिंसा छोड़ें। अगर वे वास्तव में विकास चाहते हैं, अगर वे वास्तव में लोगों की समस्याएं सुलझाना चाहते हैं, तो उनका वार्ता के लिए स्वागत है।
   
उन्होंने कहा कि मैंने उनसे (नक्सलियों से) कहा कि हम दुनिया की किसी भी चीज पर बात कर सकते हैं, लेकिन उन्हें हिंसा छोड़नी चाहिए।

पीसीपीए द्वारा नक्सलियों को किसी भी तरह के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सहयोग पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि अगर उन्हें वास्तव में कोई समस्या है, तो वह अपने पद का उपयोग करते हुए प्रदेश सरकार और उनके बीच वार्ता सुनिश्चित करेंगे।
गृह मंत्री ने कहा कि उन्होंने डर के कारण माओवादियों का साथ देने वाले ग्रामीणों से भी अपील की कि वे ऐसा न करें। मैंने उनसे अपील की कि वे नक्सलवादियों को किसी तरह का सहयोग न दें। नक्सलवादी लोगों के लिए किसी तरह का विकास नहीं कर सकते।

चिदंबरम इस बात से भी सहमत हुए कि विकास की कमी के कारण ग्रामीणों के पास असंतुष्ट होने के कारण हैं। चिदंबरम ने कहा कि मैंने उनसे कहा कि नक्सली आपको मार रहे हैं और आपको लगातार मारते रहेंगे। उनकी समाज में कोई जगह नहीं है।  
चिदंबरम ने संयुक्त बलों के नक्सल विरोधी अभियान के परिणाम को मिश्रित की संज्ञा देते हुए कहा कि कुछ कमियों को दूर करना जरूरी है।
 

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