परमाणु हथियारों को आतंकवादियों की पहुंच से दूर रखने पर एक समझौता करने के लिए सोमवार को वाशिंगटन में अभूतपूर्व परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन शुरू हो गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित 47 देशों के नेता इस सम्मेलन में ऐसा समझौता तैयार करने के लिए एकत्र हुए हैं जिससे परमाणु हथियारों को आतंकवादियों के हाथों में जाने से रोका जा सके।
सम्मेलन ओबामा की इस चेतावनी के साथ शुरू हुआ है कि अलकायदा जैसे आतंकवादी संगठन अपने को परमाणु हथियारों से लैस करने की महत्वाकांक्षा रखते हैं।
राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों के इस सम्मेलन को विश्व के सबसे बड़े सम्मेलन के रूप में परिभाषित किया जा रहा है जो पांच दशक से अधिक समय के बाद अमेरिका द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
सम्मेलन के मेजबान ओबामा इसमें शामिल हुए राष्ट्र प्रमुखों के साथ रात्रिभोज में बात करेंगे कि लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि परमाणु प्रसार को रोकने के लिए व्यापक या नयी साहसिक पहल की उम्मीद नहीं है।
सामरिक संवाद के लिए राष्ट्रीय उप सलाहकार बेन रोडेस ने टेलीफोनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह रात्रिभोज परमाणु आतंकवाद के खतरे के समाधान के प्रति समर्पित होगा।
ओबामा सम्मेलन के मद्देनजर पहले ही यह चेतावनी दे चुके हैं कि अलकायदा जैसे आतंकी संगठन परमाणु हथियार या जनसंहार के अन्य हथियार हासिल करने की प्रक्रिया में हैं और उन्हें इनका इस्तेमाल करने में कोई शिक्षक नहीं होगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने सम्मेलन के लिए यह आवाज रविवार रात प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ मुलाकात के दौरान उठाई। ओबामा ने चार साल के भीतर विश्व की पूरी परमाणु सामग्री की सुरक्षा सुनिश्चत करने का लक्ष्य तय किया है।
बातचीत में परमाणु हथियार हासिल करने के ईरान के प्रयासों तथा उत्तर कोरिया के परमाणु जखीरे और परमाणु हथियार संबंधी सामग्री तथा प्रौद्योगिकी के निर्यात को रोकने का मुद्दा भी अहम होगा।
रात्रिभोज से पहले ओबामा सम्मेलन में शामिल होने आए प्रत्येक नेता का औपचारिक स्वागत करेंगे। उन्होंने कहा हमारा विश्वास है कि सम्मेलन सामूहिक कार्रवाई की ओर प्रेरित करने के लिए अत्यावश्यक है जिससे अमेरिकी लोगों तथा वैश्विक सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरे से निपटा जा सके क्योंकि यह परमाणु हथियार हासिल करने की आतंकवादियों की क्षमता और हमारे तथा विश्व के किसी भी शहर में इनके इस्तेमाल से संबंधित है।
रोडस ने कहा कि तत्काल विनाश और जनहानि, दोनों के संदर्भ में स्पष्ट तौर पर इसके घातक परिणाम होंगे और सक्रिय परमाणु आतंकवाद के बाद इससे वैश्विक सुरक्षा माहौल के लिए भी जटिलताएं पैदा होंगी।
रोडस ने कहा कि इसलिए कल (मंगलवार) की रात इस खतरे को लेकर आम राय बनाने के लिए राष्ट्रपति प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों से चर्चा करेंगे, ताकि खतरे को लेकर उनका रुख जाना जा सके और नि:संदेह इस बारे में कि इसका मुकाबला करने के लिए क्या किए जाने की जरूरत है।
दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के अंत में विश्व नेताओं द्वारा एक दस्तावेज जारी किए जाने की संभावना है जिसमें परमाणु आतंकवाद को गंभीर खतरा माना जाएगा और चार साल के भीतर सभी संवेदनशील परमाणु सामग्री को सुरक्षित करने की बात कही जाएगी।
राष्ट्रपति के वरिष्ठ सलाहकार और परमाणु अप्रसार मामलों के वरिष्ठ निदेशक गैरी सैमूर ने कहा कि विश्व नेताओं की ओर से एक उच्चस्तरीय दस्तावेज जारी होगा जिसमें परमाणु आतंकवाद को गंभीर खतरे के रूप में मान्यता दी जाएगी और यह चार साल के भीतर सभी संवेदनशील परमाणु सामग्री को सुरक्षित करने के राष्ट्रपति के प्रयासों का समर्थन करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित 47 देशों के नेता इस सम्मेलन में ऐसा समझौता तैयार करने के लिए एकत्र हुए हैं जिससे परमाणु हथियारों को आतंकवादियों के हाथों में जाने से रोका जा सके।
सम्मेलन ओबामा की इस चेतावनी के साथ शुरू हुआ है कि अलकायदा जैसे आतंकवादी संगठन अपने को परमाणु हथियारों से लैस करने की महत्वाकांक्षा रखते हैं।
राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों के इस सम्मेलन को विश्व के सबसे बड़े सम्मेलन के रूप में परिभाषित किया जा रहा है जो पांच दशक से अधिक समय के बाद अमेरिका द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
सम्मेलन के मेजबान ओबामा इसमें शामिल हुए राष्ट्र प्रमुखों के साथ रात्रिभोज में बात करेंगे कि लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि परमाणु प्रसार को रोकने के लिए व्यापक या नयी साहसिक पहल की उम्मीद नहीं है।
सामरिक संवाद के लिए राष्ट्रीय उप सलाहकार बेन रोडेस ने टेलीफोनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह रात्रिभोज परमाणु आतंकवाद के खतरे के समाधान के प्रति समर्पित होगा।
ओबामा सम्मेलन के मद्देनजर पहले ही यह चेतावनी दे चुके हैं कि अलकायदा जैसे आतंकी संगठन परमाणु हथियार या जनसंहार के अन्य हथियार हासिल करने की प्रक्रिया में हैं और उन्हें इनका इस्तेमाल करने में कोई शिक्षक नहीं होगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने सम्मेलन के लिए यह आवाज रविवार रात प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ मुलाकात के दौरान उठाई। ओबामा ने चार साल के भीतर विश्व की पूरी परमाणु सामग्री की सुरक्षा सुनिश्चत करने का लक्ष्य तय किया है।
बातचीत में परमाणु हथियार हासिल करने के ईरान के प्रयासों तथा उत्तर कोरिया के परमाणु जखीरे और परमाणु हथियार संबंधी सामग्री तथा प्रौद्योगिकी के निर्यात को रोकने का मुद्दा भी अहम होगा।
रात्रिभोज से पहले ओबामा सम्मेलन में शामिल होने आए प्रत्येक नेता का औपचारिक स्वागत करेंगे। उन्होंने कहा हमारा विश्वास है कि सम्मेलन सामूहिक कार्रवाई की ओर प्रेरित करने के लिए अत्यावश्यक है जिससे अमेरिकी लोगों तथा वैश्विक सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरे से निपटा जा सके क्योंकि यह परमाणु हथियार हासिल करने की आतंकवादियों की क्षमता और हमारे तथा विश्व के किसी भी शहर में इनके इस्तेमाल से संबंधित है।
रोडस ने कहा कि तत्काल विनाश और जनहानि, दोनों के संदर्भ में स्पष्ट तौर पर इसके घातक परिणाम होंगे और सक्रिय परमाणु आतंकवाद के बाद इससे वैश्विक सुरक्षा माहौल के लिए भी जटिलताएं पैदा होंगी।
रोडस ने कहा कि इसलिए कल (मंगलवार) की रात इस खतरे को लेकर आम राय बनाने के लिए राष्ट्रपति प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों से चर्चा करेंगे, ताकि खतरे को लेकर उनका रुख जाना जा सके और नि:संदेह इस बारे में कि इसका मुकाबला करने के लिए क्या किए जाने की जरूरत है।
दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के अंत में विश्व नेताओं द्वारा एक दस्तावेज जारी किए जाने की संभावना है जिसमें परमाणु आतंकवाद को गंभीर खतरा माना जाएगा और चार साल के भीतर सभी संवेदनशील परमाणु सामग्री को सुरक्षित करने की बात कही जाएगी।
राष्ट्रपति के वरिष्ठ सलाहकार और परमाणु अप्रसार मामलों के वरिष्ठ निदेशक गैरी सैमूर ने कहा कि विश्व नेताओं की ओर से एक उच्चस्तरीय दस्तावेज जारी होगा जिसमें परमाणु आतंकवाद को गंभीर खतरे के रूप में मान्यता दी जाएगी और यह चार साल के भीतर सभी संवेदनशील परमाणु सामग्री को सुरक्षित करने के राष्ट्रपति के प्रयासों का समर्थन करेगा।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें