यम और नियम के अभ्यास से जिस व्यक्ति ने नैतिक उन्नति कर ली हो, उसकी आत्मा भी महान् और आकर्षक हो जाती है, अर्थात् उसका व्यक्तित्व तेजस्वी हो जाता है। वह लाखों को आत्म-प्रभावित कर सकता है। ~~~~~
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