चिरायु अमीन ने स्वीकारा कि पुणे टीम की बोली में वे भी शामिल थे !! - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 5 जून 2010

चिरायु अमीन ने स्वीकारा कि पुणे टीम की बोली में वे भी शामिल थे !!


आईपीएल के चेयरमैन चिरायु अमीन ने कहा कि उन्होंने आईपीएल में पुणे फ्रेंचाइजी के लिए बोली लगाई थी। अमीन ने बीसीसीआई को पत्र लिखकर कहा कि पुणे फ्रेंचाइजी के लिए लगाई गई बोली में वे भी शामिल थे। चिरायु पर आईपीएल के भूतपूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने यह आरोप लगाया था। एक अखबार ने यह खबर छापी थी कि आईपीएल के लिए नई टीम पुणे के लिए लगने वाली बोली में सिटी कॉर्प भी शामिल थी जिसमें कृषि मंत्री शरद पवार और उनके परिवार का पैसा लगा था।


दूसरी तरफ आईपीएल फ्रेंचाइजी की बोली के नए विवाद में केंद्रीय कृषि मंत्री और आईसीसी के अध्यक्ष निर्वाचित शरद पवार अब सियासी दांवपेंच में बुरी तरह से फंसते नजर आ रहे हैं। एक अखबार द्वारा यह खुलासा करने के बाद कि आईपीएल के लिए बनाई गई नई टीम पुणे की नीलामी के समय सिटी कॉर्प ने भी बोली लगाई थी जिसमें शरद पवार और उनके परिवार का भी शेयर लगा था, इस खबर के बाद राजनीतिक दलों के साथ क्रिकेट जगत में भी उनकी अच्छी-खासी आलोचना हो रही है।

पूर्व आईसीसी अध्यक्ष एहसान मनी ने कहा है कि पवार को आईसीसी के सामने सफाई देने के लिए तैयार रहना चाहिए। अगर वे पाक-साफ हैं तो उन्हें किसी भी बात से डरना नहीं चाहिए साथ ही जिस तरह से उनपर और उनके परिवार पर पुणे टीम के लिए लगाई गई बोली में सिटी कार्प में हिस्सेदारी का आरोप लगा है उसको देखते हुए तो यही लग रहा है कि कहीं न कहीं सच्चाई तो है लेकिन यह एक गंभीर विषय है जिसकी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आईसीसी की तरफ से हमें एक लेटर मिला था जिसमें यह साफ-साफ लिखा गया है कि कोई भी सदस्य जो बोर्ड में शामिल है वह किसी भी हालत में व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकता। अगर पवार ने ऐसा किया है तो यह बेहद ही गलत है, इसकी जल्द से जल्द जांच होनी चाहिए।

पुणे टीम के लिए लगी बोली में सिटी कॉर्प कंपनी में हिस्सेदारी की बात को लेकर बुरी तरह से फंसे पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष शरद पवार के बचाव में श्रीलंका क्रिकेट एसोशिएशन आ गया है। श्रीलंका की तरह से यह बयान आया है कि पवार पूरी तरह से सही हैं और उन्हें फंसाया जा रहा है।
श्रीलंका जहां पर शरद पवार के बचाव में जहां पर श्रीलंका पूरी तरह से बचाव की मुद्रा में आगे आ गया है वहीं दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड बोर्ड ने इस पूरे प्रकरण पर चुप्पी साध ली है। पवार पर यह दोनों बोर्ड कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया है।

उधर भारतीय राजनीति में पवार के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। भाजपा सहित लेफ्ट ने तो प्रधानमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है साथ ही इस पूरे प्रकरण पर जांच बैठाने की अपील की है। चारों तरफ से आरोप झेल रहे पवार ने उन मीडिया रिपोर्टो को खारिज कर दिया है कि उनका परिवार इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की फ्रेंचाइजी टीमों की बोली में शामिल था। हालांकि बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष पवार ने कहा, ‘मेरे परिवार का कोई भी सदस्य न तो आईपीएल टीम में और न ही बोली प्रक्रिया में शामिल था।’ पवार की पुत्री सांसद सुप्रिया सुले ने भी कहा कि उनके परिवार का आईपीएल टीमों की बोली प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है।

एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि जिस सिटी कापरेरेशन ने मार्च में आईपीएल की पुणे टीम की बोली 1200 करोड़ रुपए लगाई थी, उसमें पवार और उनके परिवार की 16 फीसदी हिस्सेदारी है। पुणे फ्रेंचाइजी की बोली सहारा ने 1700 करोड़ रुपए में खरीदी थी।

पवार ने कहा कि सिटी कापरेरेशन के बोर्ड ने आईपीएल बोली में नहीं उतरने का फैसला किया था। लेकिन कंपनी के प्रबंध निदेशक अनिरुद्ध देशपांडे ने निजी हैसियत से बोली में हिस्सा लिया। पवार ने कहा, ‘बोर्ड ने एकमत से फैसला लिया था कि आईपीएल बोली में शामिल नहीं होना है। लेकिन प्रबंध निदेशक की बेताबी को देखते हुए उन्हें निजी हैसियत से बोली लगाने की अनुमति दी गई थी।’ कृषि मंत्री ने कहा, ‘सिटी कापरेरेशन यह बोली सहारा से हार गया। यदि मैंने किसी तरह के प्रभाव का इस्तेमाल किया होता तो क्या हम बोली हार सकते थे।’

देशपांडे ने पुणे से पवार का बचाव करते हुए कहा कि इस बोली का पवार परिवार के साथ कोई संबंध नहीं है और उन्होंने निजी हैसियत से टीम के लिए बोली लगाई थी। उन्होंने कहा कि यह पवार को बदनाम करने की कोशिश है।

आईपीएल के निलंबित कमिश्नर ललित मोदी ने पवार के बोली में शामिल होने की खबर को बचकाना बताया और कहा कि देशपांडे ने खुद अपने नाम से बोली दी थी। उन्होंने एक कंसोíटयम भी बनाया था और यह भी कहा था कि एक नई कंपनी गठित की जाएगी।

भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने पवार पर आईपीएल के तथ्यों को लेकर देश को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए उनसे इस्तीफा मांगा है। प्रसाद ने कहा कि अगर वे इस्तीफा नहीं देते तो प्रधानमंत्री को उन्हें बर्खास्त कर देना चाहिए।

हालांकि भले ही सिटी कॉर्पोरेशन ने पुणे की टीम खरीदने में शामिल थी लेकिन नीलामी में सहारा समूह ने सबसे ज्यादा 1702 करोड़ की बोली लगाई थी। जो बोली लगाने वालों से सबसे ज्यादा था, इस वजह से सिटी कॉर्पोरेशन को पुणे की टीम नहीं मिल सकी थी।

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