ओटीए के प्रवक्ता आरके चौधरी ने कहा, "वह समस्त मेरिट लिस्ट में सर्वश्रेष्ठ रहीं. उन्होंने दूसरे लोगों को अपनी काबलियत और हुनर से चकित कर दिया."
चेन्नई के एक व्यापारी की पुत्री दिव्या ने एक समाचार पत्र से बात करते हुए कहा कि वह प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती थीं लेकिन नेश्नल कैडट कोर में जाने के बाद उन्होंने वहां जाने का विचार छोड़ दिया. उनके पिता अजित कुमार ने बीबीसी तमिल सेवा से बात करते हुए कहा, "अपनी पढ़ाई के दौरान उसने एकैडमी में कई सारे पुरस्कार जीते. लेकिन उसने स्वोर्ड ऑफ़ ऑनर के बारे में नहीं सोचा था. यह एक बड़ा ही सुखद एहसास है."
भारतीय सेना में महिलाओं की भर्ती 1992 से शुरू हुई और इस साल अदालत के फ़ैसले के बाद उन्हें अब सेना में स्थाई पद भी दिए जाएंगे.
लेकिन अभी तक भारतीय सेना में महिलाओं को युद्ध में भाग लेने वाली यूनिट में दाख़िल नहीं किया जा रहा है. इसके बजाए वे इंजिनियरिंग, सैन्य शिक्षा और खुफ़िया विभागों में काम करती हैं. सेना प्रमुख वीके सिंह ने कहा कि युद्ध अभियानों में महिलाओं की भागीदारी कोई सहज सवाल नहीं है इस पर गहरे चिंतन की ज़रूरत है. उन्होंने कहा, "सेना में महिलाओं का रोल है. सेना के बहुत सारे कामों में उनके लिए जगह है. जहां तक वास्तविक युद्ध में उनकी भूमिका का सवाल है तो हमें इस बारे में गंभीरता से सोचने की ज़रूरत है." सेना प्रमुख ने ये भी कहा कि सेना में शामिल व्यक्ति चाहे युद्ध कर रहा हो या परोक्ष भूमिका में हो सभी लड़ाई में शामिल होते हैं.

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