बिहार के गोपालगंज जिले में गंडक नदी पर बने सारण तटबंध को बचाने के प्रशासन का सारे प्रयास विफल हो गए और वह गुरुवार दोपहर को टूट गया। तटबंध टूटने के बाद इस क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। तटबंध टूटने के बाद जिले के कई गांवों में पानी घुस गया है। हालांकि इस इलाके में रहने वाले लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर चले जाने को कहा गया था। इस क्षेत्र में जो लोग बचे हुए थे, वे अब यहां से ऊंचाई वाले स्थानों की ओर जा रहे हैं। स्थानीय विद्यालय, पंचायत और अन्य सरकारी भवनों की छत पर लोग शरण ले रहे हैं। इसके पहले ही प्रशासन द्वारा तटबंध को बचाने का कार्य गुरुवार को एक बार फिर शुरू किया गया था। इस कार्य में स्थानीय ग्रामीणों सहित तीन हजार से ज्यादा लोग लगे हुए थे। लेकिन तटबंध को बचाया नहीं जा सका।इस बीच राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री दिनेश चन्द्र ठाकुर ने बताया कि सभी प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य के इंतजाम कर लिये गए हैं। विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंच चुके हैं। गोपालगंज के एक अधिकारी ने बताया कि रात को अहतियात के तौर पर कार्य रोक दिया गया था और सभी लोगों को तटबंध खाली करने का निर्देश दिया गया था। राष्ट्रीय आपदा सुदृढ़ीकरण बल (एनडीआरएफ) की पांच टुकड़ियां गोपालगंज, दो टुकड़ियां छपरा और एक टुकड़ी सीवान जिले में मोटरवोट के साथ किसी भी स्थिति से निपटने को तैयार है। प्रभावित क्षेत्रों से पहले ही लोगों को हटाया जा रहा है। इनके लिए शिविर लगाए गए हैं। पशुओं के लिए भी व्यवस्था की गई है। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा इन क्षेत्रों में 1,500 तम्बू भी भेजे गए हैं। गंडक नदी से निकले पानी की चपेट में पांच लाख से ज्यादा की आबादी आ सकती है। इधर, आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव व्यास जी ने बताया कि स्थिति से निपटने के लिए विभाग मुस्तैद है। किसी भी हालात से निपटने के लिए गोपालगंज, सीवान और छपरा के जिलाधिकारियों को सतर्क कर दिया गया है।
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