उत्तर प्रदेश सरकार 24 सितंबर को आने वाले इस संभावित फैसले को लेकर बेहद सजग है। वह फैसला सुनाने वाले जजों की सुरक्षा के लिए भी व्यापक योजना बना रही है। इसी के तहत इन जजों को हेलीकॉप्टर से सीधे कोर्ट परिसर ले जाने की तैयार है।
अयोध्या में भारी मात्रा में सुरक्षा बलों के पहुंचने के कारण आवास का संकट पैदा हो गया है। उनके लिए शहर से सटे ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल कालेज व सार्वजनिक स्थलों पर डेरे लगाए जा रहें है।
पक्षकरों ने दाखिल की आपत्ति : फैसले की तारीख टालने और मध्यस्थता के जरिए इसका हल निकालने की मांग करने वाली याचिकाओं के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में गुरुवार को तीन आपत्ति याचिकाएं दाखिल की र्गई। यह आपत्तियां सुन्नी वक्फ बोर्ड के जफरयाब जिलानी और मोहम्मद हाशिम व हिन्दू महासभा के हरिशंकर जैन ने दाखिल की। इनमें फैसले को टालने व मध्यस्थता से हल करने की मांग करने वालों पर हर्जाना लगाने और ऐसी याचिकाएं निरस्त करने की मांग की गई है।
अयोध्या मामले पर 24 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आने की संभावना के मद्देनजर सरकार ने सभी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। सरकार का कहना है कि फैसले से अगर कोई वर्ग संतुष्ट नहीं हो पाता है तो आगे कानूनी विकल्प खुले हुए हैं।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया है। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला कानूनी प्रक्रिया में एक कदम होगा। अगर कोई फैसले से संतुष्ट नहीं होता है तो आवश्यकता पड़ने पर और कानूनी उपाय किए जा सकते हैं।
सीआरपीएफ की 40 कंपनियां : सरकार ने प्रारंभिक चरण मंे सीआरपीएफ की 40 कंपनियों को अयोध्या भेजने का निर्णय लिया है। उत्तरप्रदेश सरकार ने 630 कंपनियों की मांग की है। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 21 सितंबर तक यह आकलन कर लिया जाएगा कि उप्र सरकार को अर्धसैनिक बलों की कितनी कंपनियां दी जा सकती हैं।
अयोध्या मामले पर फैसले का दिन करीब आता देख संघ ने इस मसले पर संसद में कानून पारित करने की मांग फिर बुलंद कर दी है। पिछले दो दिन से यहां झंडेवालान स्थित संघ कार्यालय में चल रही मंत्रणा में महसूस किया गया कि राम मंदिर के मुद्दे को गरमाए रखने के लिए संसद में कानून बनाने की मांग सबसे कारगर नारा है। हालांकि संघ नेतृत्व ने दोहराया है कि फैसला उनके पक्ष में न होने पर भी उनकी ओर से हिंसा नहीं होगी।
संघ के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अगर फैसला राम मंदिर के पक्ष में आ जाए तो भी यह केवल 2.77 एकड़ की विवादित जमीन के संबंध में होगा। भव्य मंदिर बनाने के लिए 67 एकड़ की पूरी जमीन की जरूरत है। लिहाजा, फैसला कुछ भी हो कानून बनाने की मांग बरकरार रहा ।
अयोध्या विवाद का अदालती फैसला आने के मद्देनजर सभी तनाव में हैं, वहीं उत्तरप्रदेश के एक गांव में सोहार्द की अनूठी मिसाल सामने आई। दरअसल, महराजगंज जिले के धुसवाकला गांव में मलंग बाबा की मजार के जीर्णोद्धार के लिए खुदाई करते वक्त शिवलिंग और नंदी की प्रतिमाएं निकल र्आई। यह घटना मंगलवार की है। शिवलिंग निकलने पर हिंदुओं ने वहां पूजा-पाठ शुरू की दी। मामला उलझता देख गांव के हिंदुओं और मुसलमानों ने विवादित जमीन आधी-आधी बांट ली।

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