कॉकरोच के दिमाग के प्रतिरोधक अणु सुपर बग से लड़ने में ठोस हथियार !! - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 8 सितंबर 2010

कॉकरोच के दिमाग के प्रतिरोधक अणु सुपर बग से लड़ने में ठोस हथियार !!

कॉकरोच के दिमाग में शक्तिशाली प्रतिरोधक अणु मौजूद रहते हैं जो सुपर बग के इलाज में काम आ सकते हैं। विश्व में न्यू डेल्ही के नाम पर रखे गए जीन एनएमडी-1 (सुपरबग) को लेकर चिंतित वैज्ञानिक शोध कार्य में लगे हुए हैं। ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने इसी सिलसिले में किए जा रहे अध्ययन में पाया है कि कॉकरोच इस जीन से लड़ने में ठोस हथियार साबित हो सकता है।

इसी बीच जापान में भी एनएमडी-1 का पहला मरीज मिला है। इस व्यक्ति का अप्रैल 2009 में भारत में इलाज किया गया था। इस जीन की मौजूदगी सामने आने के बाद जापानी सरकार ने सभी अस्पतालों की जांच करने का फैसला किया है।

ब्रिटेन में नॉटिंघम विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अध्ययन में पाया है कि जो जंतु अस्वच्छ स्थानों पर रहते हैं, उनके ब्रेन टिशु और नर्वस सिस्टम में मजबूत एंटी बायोटिक अणु विकसित हो जाते हैं। कॉकरोच इनमें से एक है, जिसके दिमाग में काफी शक्तिशाली प्रतिरोधक अणु मौजूद रहते हैं। रिसर्च में भाग ले रहे सिमॉन ली ने बताया कि ये अणु एनएमडी-1 का इलाज खोज रहे वैज्ञानिकों के लिए काफी लाभदायक साबित हो सकते हैं। इस स्टडी में लगे दूसरे वैज्ञानिक डा. नवेद खान ने बताया कि एनएमडी-1 सुपर बग पर वर्तमान प्रतिरोधक दवाइयों का कोई असर नहीं होता। लेकिन यह खोज नए एंटी बायोटिक को विकसित करने में मदद करेगी।

हाल ही में विश्व के कई देशों में इस नए सुपरबग के मरीज मिलने की खबर आई और कहा गया कि इस सुपरबग की जड़ भारत में है। इस पर किसी एंटी बायोटिक का असर ही नहीं होता है। वैज्ञानिकों ने इस जीन का नाम न्यू डेल्ही मेटेलो बी लेक्टामेस यानी एनएमडी-1 दिया। यह जीन आम तौर पर ई कोली बैक्टीरिया में पाया जाता है। हालांकि भारतीय वैज्ञानिकों ने इस जीन का नाम दिल्ली पर रखने का विरोध किया है और इसे भारत में फल फूल रहे मेडिकल टूरिज्म के खिलाफ साजिश बताया है।

लेकिन यह जीन काफी घातक है और बैक्टीरिया के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। ये बहुत ही तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर सकता है। इस बैक्टीरिया से छुटकारा पाने का भी कोई तरीका नहीं है। फिलहाल दुनिया में इसका इलाज संभव नहीं है। कई तरह की दवाइयां इसके इलाज के लिए बनाई गई है लेकिन फिर भी अब तक ये डॉक्टरों के लिए चुनौती ही बना हुआ है। अब तक आस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका. हालैंड, स्वीडन और ब्रिटेन में इस सुपरबग के मरीज मिल चुके हैं।

जापान में एनएमडी-1 सुपर बग का पहला मरीज मिल गया है। जापानी सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी केनसुके नाकाजिमा ने कहा कि यह व्यक्ति अप्रैल 2009 में भारत के एक अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती हुआ था। लेकिन उन्होंने न तो व्यक्ति की पहचान बताई और न ही यह जानकारी दी कि उसका भारत में किस सिलसिले में इलाज हुआ था।

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