पार्टी ने झामुमो के ऑल झारखण्ड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू), जनता दल (युनाइटेड) और निर्दलीयों सहित 45 विधायकों के समर्थन की चिट्ठी भी राज्यपाल एम.ओ.एच. फारूक को सौंप दी। सूत्रों के मुताबिक नई सरकार के गठन के लिए राज्यपाल बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय को प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों से अवगत कराने संबंधी रिपोर्ट भेजेंगे और राष्ट्रपति शासन हटाने की अनुशंसा करेंगे। इससे पहले मंगलवार को उन्होंने कानूनी विशेषज्ञों से सलाह मशविरा भी किया।
सूत्रों ने यह भी बताया कि राज्यपाल को सौंपे गए समर्थन पत्र में विधायकों के हस्ताक्षरों का विधानसभा के रिकार्ड से मिलान कराया गया।
राज्यपाल से मुलाकात के दौरान मुंडा के साथ भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष रघुबर दास, झामुमो विधायक दल के नेता हेमंत सोरेन, आजसू के नेता सुदेश महतो सहित कुल 44 विधायक उपस्थित थे। मुंडा ने संवाददाताओं से कहा, ''हमने 45 विधायकों के समर्थन की चिट्ठी राज्यपाल को सौंपी है। इस दौरान 44 विधायक राजभवन में मौजूद थे।''
सूत्रों के अनुसार राज्यपाल फारूक भाजपा-झामुमो के दावे पर कानूनी विशेषज्ञों की सलाह ले रहे हैं। 81 सदस्यों की विधानसभा में भाजपा के 18, झामुमो के 18, आजसू के पांच और जद (यु) के दो सदस्य हैं। दो निर्दलीय विधायकों चमरा लिंडा और विदेश सिंह ने मुंडा को समर्थन दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री मुंडा को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया। विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद मुंडा और दास ने झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन से मुलाकात की। सोरेन ने कहा, ''मैंने सरकार बनाने के लिए मुंडा को अपना आशीर्वाद दिया है।''
3० मई को शिबू सोरेन के इस्तीफा देने के बाद दो मई से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है। पिछले 1० महीने में यह दूसरा मौका है जब भाजपा और झामुमो सरकार बनाने के लिए साथ आए हैं।

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