दोहे और उक्तियाँ !! - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

गुरुवार, 9 सितंबर 2010

दोहे और उक्तियाँ !!

हे प्रभु, ब्रह्माण्ड के रचियता, संसार के रक्षक।

तुम्हें नमस्कार करता हूं!

हे प्रसन्नता और परमानन्द दाता! हे करूणामय प्रभु!

मुझे सब प्राणियों के प्रति समान दृष्टि प्रदान करो।

मुझे सब दोषों और पापों से मुक्त करो!

मुझे बुद्धि को संयम करने की शक्ति दो!

मुझे निरन्तर आपकी और

समस्त जीवों की सेवा करने की शक्ति दो।

मुझे सत्य का आभास हो!

कोई टिप्पणी नहीं: