कोलाबा स्थित 31 मंजिले भवन में कारगिल युद्ध में शहीद हुए जवानों की विधवाओं, उनके परिवारों, सेना, नौसेना और डिफेंस एस्टेट्स के सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को फ्लैट देने का प्रावधान था। हालांकि, उनके अतिरिक्त 104 अपार्टमेंट वाले इस भवन में 40 फ्लैटों का आवंटन नेताओं और उनके रिश्तेदारों को भी किया गया। पूर्व सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर, जनरल एन सी विज, पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल माधवेंद्र सिंह आवंटियों में शामिल हैं। उसके बाद से वे कह चुके हैं कि वे अपना आवंटन लौटा चुके हैं।
इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि आदर्श सोसाइटी घोटाले के सिलसिले में जानकारी हासिल करने के लिए सीबीआई ने अब तक उनसे संपर्क नहीं किया है। चव्हाण ने यहां मंत्रालय में कहा 'अब तक जांच के लिए सीबीआई ने मुझसे संपर्क नहीं किया है। सीबीआई जांच का मैंने हमेशा स्वागत किया है।' मुख्यमंत्री ने कहा 'मुझे लगता है कि रक्षा विभाग जांच शुरू कर चुका है क्योंकि कहा जा रहा है कि जमीन रक्षा विभाग की है।'
संकट में घिरे चव्हाण को बुधवार को अनपेक्षित सहयोग मिला और उनके पक्ष में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे उतर गए। ठाकरे ने कहा कि आदर्श सोसाइटी घोटाला चव्हाण के खिलाफ एक षडयंत्र है। उन्होंने इस मामले की मीडिया ट्रायल पर भी घोर आपत्ति जताई और कहा कि मीडिया को कोई राय देने से पहले जांच का इंतजार करना चाहिए। ठाकरे पर शिव सेना यह आरोप लगाती रही है कि वह सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी से नजदीकी बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा, 'अगर चव्हाण को जांच के बाद दोषी पाया जाता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए लेकिन जांच खत्म होने के पहले नहीं।' चव्हाण के पक्ष में ठाकरे का यह बयान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार के उस बयान के ठीक एक दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर जमीन राज्य सरकार की थी तो जमीन का फ्लैट आवंटन कतई गलत नहीं था। हालांकि, यह पूछे जाने पर कि अगर जमीन भारतीय नौसेना की हो तो पवार ने कहा कि ऐसी स्थिति में उनकी पार्टी का रुख अलग होगा। चव्हाण के समर्थन में ठाकरे के उतरने से कांग्रेसी नेता भी हैरान हैं क्योंकि अब तक पार्टी के किसी नेता ने इस मामले में खुलकर मुख्यमंत्री का बचाव नहीं किया है।

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