
एनडीए सरकार द्वारा 1999 में अपनाई गई दूरसंचार नीति पर टिप्पणी करते हुए दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि बीजेपी पहले अपने गिरेबान में झांक कर देखे। सिब्बल ने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार के दौरान सरकार की नीतियों में परिवर्तन के कारण देश को 1.43 लाख करोड़ रुपये का नुकसान सहना पड़ा था।
इस बयान के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह उनसे बदला लेने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें यह बताने के लिए है कि संस्थाओं पर हमला बोलने और संसदीय लोकतंत्र के स्तर को नीचे ले जाने से पहले आप कृपया अपने भीतर झांक कर देख लें। सिब्बल ने दावा किया था कि वर्ष 1999 में तत्कालीन बीजेपी नीति, एनडीए सरकार के दूरसंचार गतिविधियों के लिए फिक्स्ड लाइसेंस शुल्क की जगह राजस्व भागीदारी तंत्र अपनाने से सरकार को 1.43 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान सहना पड़ा था।
सिब्बल ने कहा कि वह केवल भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहे थे। केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'इस देश में भ्रष्टाचार एक मुद्दा बन गया है, जो समाज के हर तबके में दिख रहा है। मीडिया भी इससे दूर नहीं है। राजनीतिक वर्ग भी इससे अलग नहीं है। पेशेवर वर्ग भी इससे परे नहीं है। यह एक समाज से जुड़ा मुद्दा बन गया है, जिससे सामूहिक तौर पर निपटने की जरूरत है।'
वहीं बीजेपी ने सिब्बल के आरोपों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मंत्री 2 जी स्पेक्ट्रम मामले में चीजों का बचाव कर रहे हैं, जिनका बचाव नहीं किया जा सकता। सिब्बल के आरोपों पर टिप्पणी करते हुए बीजेपी प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, यह बचाव का सबसे खराब तरीका है।
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