एनडीए ने प्रधानमन्त्री पर निशाना साधा. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 22 दिसंबर 2010

एनडीए ने प्रधानमन्त्री पर निशाना साधा.

एनडीए ने कहा है कि यदि प्रधानमंत्री 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में संयुक्त संसदीय समिति(जेपीसी) की जांच नहीं चाहते तो वे अपने पद से इस्तीफा दे दें। नई दिल्ली के रामलीला मैदान पर बुधवार को आयोजित रैली में करीब-करीब सभी वक्ताओं ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में हुए घोटाले की जवाबदारी से वे बच नहीं सकते।

एनडीए ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के अलावा भ्रष्टाचार के उजागर हुए दूसरे मामलों के विरोध में देशव्यापी आंदोलन की आज से शुरुआत की। पार्टी इसके बाद विभिन्न प्रदेश की राजधानियों में भी इसी तरह की रैलियां आयोजित करेगी। एनडीए ने कुछ समय पहले खत्म हुए संसद के शीतकालीन सत्र में 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच को लेकर जेपीसी गठित करने की मांग के समर्थन में करीब 20 दिन सदन की कार्यवाही नहीं चलने दी।

रैली को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पार्टी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि यूपीए शासनकाल में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ वे जनमत तैयार करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का लोक लेखा समिति (पीएसी) के सामने हाजिर होने के प्रस्ताव में कोई दम नहीं है। राज्यसभा में पार्टी नेता अरुण जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री जेपीसी बनाने की इजाजत दें और फिर उसके सामने हाजिर होकर, सभी आरोपों का जवाब दें। और यदि वे ऐसा नहीं कर सकते तो नैतिकता के आधार पर अपना पद छोड़ दें।

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि कांग्रेस को भ्रष्टाचार पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने पूछा कि कांग्रेस जेपीसी से भयभीत क्यों है?

यूपीए के शासनकाल में 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाला, कॉमनवेल्थ खेलों के दौरान हुआ भ्रष्टाचार, मुंबई के आदर्श गृह निर्माण सोसायटी में हुआ घोटाला सहित भ्रष्टाचार के कुछ दूसरे मामले प्रकाश में आए। विपक्ष ने ये सभी मुद्दे हाल में खत्म हुए शीलकालीन सत्र के दौरान संसद में उठाए। विपक्ष ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में जेपीसी की जांच की मांग रखी, जिसे सरकार ने नामंजूर कर दिया। एनडीए ने बुधवार से इस मांग को लेकर आंदोलन छेड़ दिया है।

दिल्ली में हो रही रैली के कारण शहर में कई स्थानों पर जाम की स्थिति बन गई। मंगलवार शाम से ही कार्यकर्ताओं से भरे वाहन दिल्ली पहुंचना शुरू हो गए। यह सिलसिला आज सुबह तक जारी रहा। इस कारण कनॉट प्लेस, आईटीओ आदि स्थानों पर जाम की स्थिति बनी। सुबह दफ्तर जाने वालों को दिक्कत का सामना करना पड़ा। दिल्ली की सीमाओं पर भी यातायात प्रभावित हुआ। राजघाट, अजमेरी गेट, मिंटो ब्रिज, कमला मार्केट आदि क्षेत्रों में भी यातायात पर असर पड़ा।

संसद में वामदलों सहित पूरा विपक्ष जेपीसी की मांग पर एकजुट था, लेकिन इस रैली में केवल बीजेपी और एनडीए के घटक दल ही भाग ले रहे हैं। बीजेपी ने प्रयास किया कि एनडीए घटकों के अलावा दूसरे दल भी रैली में भाग लें, लेकिन इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली। उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने साफ कर दिया है कि बीजेडी रैली में भाग नहीं ले रही है।

शिव सेना ने भी रैली में शामिल होने का निर्णय मंगलवार रात को ही लिया। लेकिन शिव सेना की नाराजगी दूसरे कारणों से थी। शिव सेना, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के अध्यक्ष राज ठाकरे के मुंबई में बीजेपी के दफ्तर पहुंचने और वहां उनका स्वागत होने से काफी नाराज थी। लेकिन मंगलवार को बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी और सुषमा स्वराज ने शिव सेना नेता उद्धव ठाकरे से बात की, जिसके बाद वे रैली में हिस्सा लेने के लिए तैयार हो गए।

कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने बाद में एनडीए की रैली पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बीजेपी को मनमोहन सिंह का इस्तीफा मांगने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने भ्रष्टाचार के सबूत होने के बाद भी कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को नहीं हटाया अब वे किस मुंह से सिंह से इस्तीफा मांग रहे हैं।

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