क्या है मीडिया कानक्लेव की हकीकत ? - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 22 दिसंबर 2010

क्या है मीडिया कानक्लेव की हकीकत ?



हमारे एक मित्र जो पत्रकारिता की पढाई कर रहे हैंपत्रकारिता पर अपनी वही संपादकों वाली सोच रखे हुए हैंजो अन्याय और भ्रष्टाचार  अपनी लेखनी से मिटाने में लगे रहते हैंने मुझे तब एक प्रतिक्रिया दी जब मैं लगातार उन व्यक्तव्यों के वीडियो को रिपीट,रिवाइंडप्ले फॉरवार्डतो कभी उस वीडियो  को टेक्स्ट में बदलने की कोशिश कर रहा था. मैं उस दिन कॉलेज भी नहीं गया थादिन भर बीएसएनएल की इंटरनेट की धीमी गति से उस वीडियो को  अपलोड करने की कोशिश कर रहा थाकई बार अपलोड फेल की भी समस्या हो रही थी. तो ये थी मेरी मनोस्थिति.

मेरे उस मित्र के उस टिपप्णी ने कि क्या आज तक किसी कन्क्लेव में गए हैंपहली बार कोई कन्क्लेव में चले गए तो.. ऐसे कन्क्लेव रोज होते रहते हैं...

और कुछ ही देर पहले एक सन्देश आया कि अभिषेक जी प्रोग्राम के सारे वीडियो फटाफट अपलोड कर लिंक भेजेएक विषय पर ज्यादा देर बने  रहना सही नहीं हैं. मुझे झकझोर के रख दियामजबूर किया ये सोचने पर कि क्या इस पोस्ट को लिखा जाए या नहीं. फिर एक सवाल आया मेरे मन में की क्या मुझे इसे इस रूप में लिखने का हक हैं?

मैं उन तमाम दिग्गज के सामने क्या हूमेरी उम्र बमुश्किल अठारह साल ही हैं. कोई अनुभव नहीं. कोई बहुत ज्यादा ज्ञान नहीं. बस थोड़ी सी अलग सोचऔर दुनिया के विभिन्न घटनाक्रमों से हर पल वाकिफ रहने की कोशिश.

वो तो एक महानुभाव की कृपा थी कि उन्होंने मुझे बुलायामुझसे बातें कीऔर उन्ही के साथउन्ही के सौजन्य से मुझे मुकेश जीपरंजय जी और आनंद प्रधान से भी मेरी मुलाकातें हुई. इन सभी बड़े लोगों के साथ मुझे एक ही टेबल पर नाश्ता करने का भी अवसर प्राप्त हुआ. उस कन्क्लेव की जो भूमिका थी मुझे वहींउस टेबल पर उनलोगों की बातचीत से समझ आ गयी. तब जब परंजय जी के साथसाथ में वो सभी भी थेमैं उस कन्क्लेव में पहुंचाहालांकि मैं कोई उस कन्क्लेव का बुलाया हुआ मेहमान नहीं थाफिर भी गया. सुनादेखा और कैमरे में कैद कियाभोजन भी खाया.

अब जबकि मैंने अभी अभी देखा सेमिनार के बारे में कहा क्या छपा हैं. पटना के एक डेली अखबार ने इसे जिस लीड के साथ छापा क्या वही इस कन्क्लेव के दूसरे दिन मीडिया सेगमेंट का सबसे बड़ी बातें थीशायद नहींइसे आप उपरोक्त वीडियो में देख सुन सकते हैं.

भड़ास 4 मीडिया ने जिस तरह से छापा क्या उससे बस औपचारिकता पूरी नहीं हो रही थीक्या ये एक महज एक आयोजन भर था, या इस आयोजन में कहीं उम्मीद से कुछ बड़ी बाते कही गयी मीडिया और बिहार के बारें में खासकर. इन तमाम वीडियो में कोई साधारण व्यक्तव्य नहीं हैं,अगर ध्यान से सुने देंखे तो बहुत बड़ी बड़ी बातें  हैं.

क्या कन्क्लेव का मतलब बस यही होता हैं की वक्ता दूर दूर सेयहां तक की सात समुन्दर पार से आयेंपटना शहर घूमेंहोटलों में ठहरें, और अपना व्यक्तव्य देंतालियां बटोरे चलते बने, और क्या मैं नहीं इन वीडियो को अपलोड करता तो ये उस हौल से बाहर के दर्शक तक पहुँच पाता क्याहां एक बात ये भी हैं कि उसमें कई वक्ता हवाईजहाज का सफर नहीं कियेट्रेन का सफर ही पसंद किया. हां इसमें एक बहुत बेहतर वीडियो छूट गया हूसंभव हुआ तो जल्द ही उसे भी प्रकाशित करने की कोशिश करूँगा.


अभिषेक आनद,

पत्रकारिता छात्र 
संपर्क सूत्र :-   facebook.com/abhishek.letters

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