अपने अंदर शक्ति के प्रत्येक कण का संचय करो|
अपनी शक्ति को गरमागरम बहस, भाषाई विवाद
और बौद्धिक कलाबाजियों में बेकार मत करो|
बहस और कुतर्कों को पूरी तरह त्याग दो|
तभी तुम आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ पाओगे|
(स्वामी शिवानन्द )
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