बिहार विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली करारी हार का असर रविवार को यहां शुरू हुए पार्टी के महाधिवेशन में भी तब देखने को मिला, जब बिहार के कुछ पार्टी प्रतिनिधियों ने हार के जिम्मेदार लोगों को उनके पदों से हटाने की मांग की। इस सिलसिले में उन्होंने मुकुल वासनिक का सीधे-सीधे नाम ले लिया। उन पर विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी टिकट बेचने तक के आरोप लगा दिए गए। इससे भारी हंगामा मच गया।
यह सब तब हुआ जब कुछ तकनीकी खराबी से मंच का माइक बंद हो गया था, और मुकुल लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करने के मकसद से मंच पर पहुंचे। उन्हें मंच पर देख कर बिहार विधान परिषद की सदस्य उर्मिला सिंह नीलू, पूर्व विधायक राजेन्द्र सिंह बिस्मिल सहित राज्य के दर्जनों प्रतिनिधियों ने अचानक उनके विरोध में शोर मचाने लगे। बिहार के प्रभारी मुकुल वासनिक, पार्टी चुनाव प्रभारी बी के हरिप्रसाद और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष महबूब अली कैसर पर आरोप लगाया कि उन्होंने पैसे लेकर अयोग्य उम्मीदवारों को टिकट बांटे और इसी की वजह से कांग्रेस चार सीटों पर ही जीत पाई।
इसके बाद बैठक में बिहार से आए दर्जनों प्रतिनिधियों ने विरोध की आवाज उठाने वालों का समर्थन किया। आस्कर फर्नाडीस सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इन प्रतिनिधियों को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन वे असफल रहे। हंगामे को देखकर मंच के माइक बंद कर दिए गए और सेवा दल के लोग हंगामा कर रहे प्रतिनिधियों को समारोह स्थल से बाहर निकालने में जुट गए, जिसका उन नेताओं ने कड़ा विरोध किया। लगभग दस मिनट तक सभागार में हंगामा चलता रहा और इस दौरान महाधिवेशन की कार्यवाही ठप रही। असंतुष्ट नेताओं ने बाद में बाहर मीडिया से खुलकर बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन वहां भी सेवा दल के कार्यकर्ता उन्हें ऐसा करने से रोकते रहे और इन असंतुष्ट नेताओं को मीडिया से दूर ले गए।
सोमवार, 20 दिसंबर 2010
बिहार के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने किया हंगामा.
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