भारतीय डॉक्टर मोहम्मद हनीफ ने ऑस्ट्रेलिया सरकार के खिलाफ 10 लाख डॉलर मुकदमा जीत लिया है. उन्हें 2007 में आतंकवाद के आरोपों में गिरफ्तार किया गया. बाद में ये आरोप गलत साबित हुए. मोहम्मद हनीफ के वकील ने बताया कि हनीफ ने 2007 में उन पर हुए जुल्मों के मुआवजे के तौर पर एक रकम स्वीकार कर ली है. हालांकि रकम को गोपनीय रखा गया है. हनीफ को लंदन और ग्लासगो में एयरपोर्ट पर हुए नाकाम हमलों से जोड़ा गया था.
दो दिन तक चली बातचीत के बाद हनीफ ने कहा, "इस मामले के हल हो जाने के बाद मैं बहुत खुश हूं. गलत वजहों से हिरासत में रखा जाना मेरे लिए बहुत दर्दनाक अनुभव रहा. यह निपटारा मेरे और मेरे परिवार के लिए उस दौर को खत्म करने का एक मौका हो सकता है." 2007 के जुलाई में गिरफ्तार किए गए हनीफ 25 दिन तक हिरासत में रहे. पहले 12 दिन तो उन पर कोई आरोप भी नहीं लगाया गया. वह क्वींसलैंड के गोल्ड कोस्ट अस्पताल में काम करते थे. लंदन हवाई अड्डे पर हमले की एक नाकाम कोशिश के बाद इस सिलसिले में हनीफ पर एक आतंकवादी संगठन को मदद देने के आरोप लगाए गए. बाद में ये आरोप गलत साबित हुए. लेकिन इस दौरान उनका वर्किंग वीजा रद्द कर दिया गया था और वह भारत लौट गए.
इसी साल की शुरुआत में उन्होंने मुआवजा पाने के लिए कोशिशें शुरू कीं. उन्होंने आर्थिक नुकसान, भावनात्मक तनाव, छवि को नुकसान और करियर में पहुंची बाधा के आधार पर मुआवजा मांगा. उनके वकील रॉड होग्सन ने बताया, "समझौते की एक शर्त यह भी है कि दोनों पक्ष इसके बारे में बात नहीं करेंगे. मैं बस इतना बता सकता हूं कि डॉक्टर हनीफ को अच्छा खासा मुआवजा मिलेगा." हनीफ अब भारत लौटने की तैयारी कर रहे हैं. हालांकि वह कहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में रहने के बारे में वह सोच सकते हैं. उन्होंने कहा, "मैं और मेरा परिवार ऑस्ट्रेलिया यात्रा का आनंद उठा रहे हैं. यहां अपने दोस्तों से मिलना अच्छा लगता है. उम्मीद है हम एक दिन यहां लौटेंगे."
हनीफ अब संयुक्त अरब अमीरात में डॉक्टर के तौर पर काम करते हैं. वह अब भी ऑस्ट्रेलिया को पसंद करते हैं और गोल्ड कोस्ट में काम करने की तमन्ना रखते हैं.
मंगलवार, 21 दिसंबर 2010
भारतीय डाक्टर ने जीता अपना सम्मान.
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