देश के जाने माने उद्यमी तथा विप्रो समूह के प्रमुख अजीम प्रेमजी ने देश में राजकाज के स्तर में आई गिरावट पर बुधवार को कहा कि वे मौजूदा केंद्र सरकार के कामकाज से बहुत निराश हैं क्योंकि इससे लोगों को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीदें थी।
सरकार ने कल ही प्रेमजी को पद्मविभूषण अलंकरण से सम्मानित करने की घोषणा की है। एक आर्थिक सम्मेलन में भाग लेने आए विप्रो के चैयरमेन ने टीवी चैनलों से बातचीत में कहा कि मैं बेहद निराश हूं। मेरा मानना है कि यह राष्ट्रीय संकट है। मेरे लिए यह बहुत पीड़ादायक है क्योंकि जब यह सरकार (संप्रग-दो) सत्ता में आई थी तो लोगों ने इससे बड़ी उम्मीदें बांध रखी थीं।
प्रेमजी ने देश की उद्योग व्यापार, विधि एवं प्रशासन क्षेत्र की कई जानी मानी हस्तियों के साथ देश में राजकाज में गिरावट को लेकर देश के नेताओं के नाम एक पत्र जारी किया है। यह अपील जारी करने वालों में प्रेमजी के साथ महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरमैन केशुब महिंद्रा, एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख, भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर एम नरसिम्हन, बिमल जालान, न्यायमूर्ति श्रीकृष्णा भी हैं। इन हस्तियों ने देश में चारों तरफ राजकाज के छिन्न-भिन्न होने के मुद्दे को उजागार कतरे हुए भ्रष्टाचार से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम जल्द से जल्द करने पर बल दिया है।
प्रेमजी ने कहा कि मुझे लगता है कि अब शुद्धिकरण की बेला आ गई है और जब ऐसी स्थिति आ जाती है तो बदलाव के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। मैं आशावान हूं और अपील जारी करने वाले लोगों का समूह इस मुद्दे को आगे बढ़ाएगा तथा राजकाज में सुधार के लिए ठोस सुझाव देगा। उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि यह जरूरी है। चाहे सरकार हो, उद्योग हो या व्यापार हो। चारों तरफ नियम कानून छिन्न भिन्न हो गए हैं और हमें इस पर ध्यान केंद्रित करना होगा। सार्वजनिक काम-काज में आज हम ऐसे मुकाम पर पहुंच गए है जहां हमें स्थितियों पर सोचना होगा। अब बहुत हो चुका, हमें स्वयं को सुधारना होगा, हमने ऐसा न किया तो हमारे बच्चों अपने देश के नाम पर अपना सर ऊंचा करके नहीं चल सकेंगे, फिर भले ही हम आठ प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि करें या नौ प्रतिशत की।
विप्रो प्रमुख ने कहा कि वे और उनके साथी सरकार को देश को नियम कानून से चलाने के बारे में न केवल सुझाव देंगे बल्कि पूरी गंभीरता के साथ इस काम को सुनिश्चित कराने का प्रयास भी करेंगे। उन्होंने कहा कि हम सरकार को ठोस सुझाव देंगे और उसको लागू करने के लिए पूरा दबाव बनाएंगे। उन्होंने कहा कि खुले पत्र पर हस्ताक्षर करने वाली हस्तियों ने कुछ ऐसे उपायों की पहचान की है जिनको लागू करने से राजकाज का स्तर सुधर सकता है।
पद्म अलंकरण के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मैं गौरवान्वित हूं। यह बड़ा सम्मान है। मैं इसे पा कर कृतज्ञ हूं। प्रेमजी ने सेबी और रिजर्व बैंक जैसी नियामक संस्थाओं के अच्छे कामकाम का उदाहरण देते हुए कहा कि हम पर्यावरण के क्षेत्र में ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं कर सकते हैं। इस क्षेत्र में मंत्री या सचिव से अलग कोई नियामक संगठन क्यों नहीं काम कर सकता। प्रेमजी ने कहा कि उन्होंने भारत सरकार की ओर से इस खुले पत्र पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि हम उनसे प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं कर रहे हैं। कुछ लोगों से अलग से बैठक हुई है। हमारा उद्देश्य सरकार से लड़ाई लेना नहीं है, बल्कि हम चाहते हैं कि वे इसे लागू करें। विदेशों में जमा काले धन के बारे में प्रेमजी ने कहा कि जिस देश को भी इसकी (काले धन) की गंध लगी वह इसके पीछे पड़ गया। यह सार्वजनिक नैतिकता का सवाल है जो यहां दांव पर लगी है। काला धन वापस लाने में कामयाबी के बारे में पूछे जाने के बारे में उन्होंने कहा कि इसमें लगना पड़ेगा। अमेरिका ने काली कमाई में शामिल लोगों का पीछा करने का जुझारूपन दिखाया है। जब दबाव बनता है और बढ़ता है तो आपको बदलना ही होता है क्योंकि आप ऐसी स्थिति में आ जाते हैं जहां शुद्धिकरण जरूरी है।
सरकार ने कल ही प्रेमजी को पद्मविभूषण अलंकरण से सम्मानित करने की घोषणा की है। एक आर्थिक सम्मेलन में भाग लेने आए विप्रो के चैयरमेन ने टीवी चैनलों से बातचीत में कहा कि मैं बेहद निराश हूं। मेरा मानना है कि यह राष्ट्रीय संकट है। मेरे लिए यह बहुत पीड़ादायक है क्योंकि जब यह सरकार (संप्रग-दो) सत्ता में आई थी तो लोगों ने इससे बड़ी उम्मीदें बांध रखी थीं।
प्रेमजी ने देश की उद्योग व्यापार, विधि एवं प्रशासन क्षेत्र की कई जानी मानी हस्तियों के साथ देश में राजकाज में गिरावट को लेकर देश के नेताओं के नाम एक पत्र जारी किया है। यह अपील जारी करने वालों में प्रेमजी के साथ महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरमैन केशुब महिंद्रा, एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख, भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर एम नरसिम्हन, बिमल जालान, न्यायमूर्ति श्रीकृष्णा भी हैं। इन हस्तियों ने देश में चारों तरफ राजकाज के छिन्न-भिन्न होने के मुद्दे को उजागार कतरे हुए भ्रष्टाचार से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम जल्द से जल्द करने पर बल दिया है।
प्रेमजी ने कहा कि मुझे लगता है कि अब शुद्धिकरण की बेला आ गई है और जब ऐसी स्थिति आ जाती है तो बदलाव के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। मैं आशावान हूं और अपील जारी करने वाले लोगों का समूह इस मुद्दे को आगे बढ़ाएगा तथा राजकाज में सुधार के लिए ठोस सुझाव देगा। उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि यह जरूरी है। चाहे सरकार हो, उद्योग हो या व्यापार हो। चारों तरफ नियम कानून छिन्न भिन्न हो गए हैं और हमें इस पर ध्यान केंद्रित करना होगा। सार्वजनिक काम-काज में आज हम ऐसे मुकाम पर पहुंच गए है जहां हमें स्थितियों पर सोचना होगा। अब बहुत हो चुका, हमें स्वयं को सुधारना होगा, हमने ऐसा न किया तो हमारे बच्चों अपने देश के नाम पर अपना सर ऊंचा करके नहीं चल सकेंगे, फिर भले ही हम आठ प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि करें या नौ प्रतिशत की।
विप्रो प्रमुख ने कहा कि वे और उनके साथी सरकार को देश को नियम कानून से चलाने के बारे में न केवल सुझाव देंगे बल्कि पूरी गंभीरता के साथ इस काम को सुनिश्चित कराने का प्रयास भी करेंगे। उन्होंने कहा कि हम सरकार को ठोस सुझाव देंगे और उसको लागू करने के लिए पूरा दबाव बनाएंगे। उन्होंने कहा कि खुले पत्र पर हस्ताक्षर करने वाली हस्तियों ने कुछ ऐसे उपायों की पहचान की है जिनको लागू करने से राजकाज का स्तर सुधर सकता है।
पद्म अलंकरण के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मैं गौरवान्वित हूं। यह बड़ा सम्मान है। मैं इसे पा कर कृतज्ञ हूं। प्रेमजी ने सेबी और रिजर्व बैंक जैसी नियामक संस्थाओं के अच्छे कामकाम का उदाहरण देते हुए कहा कि हम पर्यावरण के क्षेत्र में ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं कर सकते हैं। इस क्षेत्र में मंत्री या सचिव से अलग कोई नियामक संगठन क्यों नहीं काम कर सकता। प्रेमजी ने कहा कि उन्होंने भारत सरकार की ओर से इस खुले पत्र पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि हम उनसे प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं कर रहे हैं। कुछ लोगों से अलग से बैठक हुई है। हमारा उद्देश्य सरकार से लड़ाई लेना नहीं है, बल्कि हम चाहते हैं कि वे इसे लागू करें। विदेशों में जमा काले धन के बारे में प्रेमजी ने कहा कि जिस देश को भी इसकी (काले धन) की गंध लगी वह इसके पीछे पड़ गया। यह सार्वजनिक नैतिकता का सवाल है जो यहां दांव पर लगी है। काला धन वापस लाने में कामयाबी के बारे में पूछे जाने के बारे में उन्होंने कहा कि इसमें लगना पड़ेगा। अमेरिका ने काली कमाई में शामिल लोगों का पीछा करने का जुझारूपन दिखाया है। जब दबाव बनता है और बढ़ता है तो आपको बदलना ही होता है क्योंकि आप ऐसी स्थिति में आ जाते हैं जहां शुद्धिकरण जरूरी है।

1 टिप्पणी:
बिलकुल सही बात है....जब दबाव बनता है और बढ़ता है तो आपको बदलना ही होता है क्योंकि आप ऐसी स्थिति में आ जाते हैं जहां शुद्धिकरण जरूरी है।
30 जनवरी 2011 को भ्रष्टाचार के खिलाप जनयुद्ध में दिल्ली के रामलीला मैदान में शामिल होइए या इसे अपने शहर में ऐसे जनयुद्ध को शुरू कीजिये.....
एक टिप्पणी भेजें