डालमिया पवार की लड़ाई का खामियाजा. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शुक्रवार, 28 जनवरी 2011

डालमिया पवार की लड़ाई का खामियाजा.

बंगाल क्रिकेट संघ और बीसीसीआई के लचर रवैये का खामियाजा कोलकाता के क्रिकेट प्रेमियों को भुगतना पड़ा है। अधूरी तैयारियों की वजह से ईडन गार्डन स्टेडियम में 27 फरवरी को भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाले मुकाबले को दूसरे स्टेडियम में करवाने का निर्णय लिया गया है। स्टेडियम के मुआयने के बाद निरीक्षण कमेटी द्वारा सौंपी रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए आईसीसी ने यह फैसला लिया।

आईसीसी के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष जगमोहन डालमिया ने कहा है कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष, सचिव और विश्वकप आयोजन समिति के चीफ रत्नाकर शेट्टी से इस मुद्दे पर बात की है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि आईसीसी अपने फैसले को पुनर्विचार करेगी और ईडन गार्डन को एक बार फिर 27 फरवरी के मुकाबले का आयोजन करने का मौका मिलेगा। इसके साथ उन्होंने यह भी कहा, यह बंगाल क्रिकेट संघ बदनाम करने की साजिश है। आईसीसी द्वारा उठाया सख्त कदम राजनीति से प्रेरित है। अगर डालमिया द्वारा कही गई बात सही है तो आखिर वो कौन है कैब और डालमिया को बदनाम करना चाहता है ?

जगमोहन डालमिया के दुश्मनों की सूची में सबसे ऊपर शरद पवार का नाम ऊपर आता है। जो अभी आईसीसी के अध्यक्ष भी हैं। तो क्या ये हम मान लें कि डालमिया को पवार से दुश्मनी का खामियाजा इस रूप में भुगतना पड़ा है। इस पूरे मामले में चौकाने वाली बात ये है कि अब तक बीसीसीआई पर अकसर ही क्रिकेट की सर्वोच्च इकाई पर दबाव बनाने का आरोप लगता रहा है जबकि ऐसा होता तो शायद ईडन गार्डन पर इतनी बड़ी गाज नहीं गिरती।

दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड पहले भी आईसीसी पर कई मुद्दों को लेकर दबाव बनाने में सफल रहा है। चाहे वह 2008 के सिडनी टेस्ट के बाद सीरीज से अंपायर स्टीव बकनर को हटाने की बात हो या फिर कोटला की पिच को लेकर उठा बवाल। हर मुद्दे पर आईसीसी बैकफुट पर दिखी है। लेकिन ईडन गार्डन को लेकर इतना कठोर फैसला सबको हैरान कर सकता है।अब सवाल यह उठता है कि शरद पवार जो इस वक्त आईसीसी के सर्वोच्च पद पर हैं। अगर वे चाहते तो शायद कोलकाता के क्रिकेट प्रेमियों को इस झटके से बचा सकते थे। तो क्या हम ये मान लें कि इस घटनाक्रम में उनकी कोई भूमिका नहीं। ऐसा पूरी तरह से संभव नहीं है। 

डालमिया ने 1979 में बीसीसीआई से जुड़े और 1983 में बोर्ड के खजांची भी बने। इसके बाद उन्होंने आई एस बिंद्रा के साथ मिलकर भारत को 1987 और 1996 के वर्ल्ड कप की मेजबानी दिलवाने में अहम भूमिका निभाई। वे 1996-97 में आईसीसी के अध्यक्ष भी रहे। इस दौरान उन पर 1996 विश्वकप के आयोजन के दौरान आर्थिक घोटाले के आरोप लगे।

डालमिया और बीसीसीआई के बीच की अनबन या यूं कहें पवार के साथ उनकी लड़ाई की शुरुआत 2004 में हुई। इस साल क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष के पद के लिए तत्कालीन महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसियेशन के अध्यक्ष शरद पवार मैदान में थे। वहीं डालमिया के खेमे के उम्मीदवार रणवीर सिंह महिंद्रा थे। ड्रामे से भरे इस चुनाव में महिंद्रा ने डालमिया की चालाकी के बूते 16-15 के अंतर से शरद पवार को हराकर अध्यक्ष बने। उल्लेखनीय है कि इस चुनाव में डालमिया ने कुल 4 वोट डाले थे। लेकिन अगले ही साल 2005 में शरद पवार ने रणवीर सिंह महिंद्रा को 20-11 के बड़े अंतर से हराकर बीसीसीआई के अध्यक्ष पद का चुनाव जीत लिया।

महिंद्रा की यह हार जगमोहन डालमिया के लिए भविष्य में आने वाली समस्याओं की शुरुआत थी। बीसीसीआई ने डालमिया पर 1996 में हुए विश्वकप में वित्तीय हेराफेरी का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ वर्ष 2006 में बॉम्बे उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। साथ ही उन्हें इसी वर्ष बोर्ड से निष्कासित कर दिया गया था इस कारण से उन्हें कैब से भी इस्तीफा देना पड़ा। वित्तीय अनियमिताओं के मामले में 2008 मार्च में डालमिया की गिरफ्तारी भी हुई। लगभग 2 साल तक चले कानूनी लड़ाई के बाद डालमिया की बंगाल क्रिकेट संघ में वापसी हुई और वे अध्यक्ष चुने गए। अध्यक्ष चुने जाने के बाद उन्होंने पवार खेमे को तगड़ा झटका दिया। कोलकाता कोर्ट ने डालमिया की शिकायत पर उस वक्त के बीसीसीआई के अध्यक्ष शशांक मनोहर और शरद पवार के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश दिए। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने सितंबर 2010 में 81वीं वार्षिक आम बैठक में अपने पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया को बडी राहत देते हुए उनके खिलाफ मामला वापस लेने के साथ ही उनका निष्कासन भी समाप्त कर दिया।

जगमोहन डालमिया ने पूरे मुद्दे को राजनीतिक साजिश करार दिया है तो ऐसे में पवार की भूमिका पर सवाल उठना स्वभाविक है। राजनीतिक हो या कोई अन्य कारण असल खामियाजा तो कोलकाता के करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों को भुगतना पड़ा है।

कोई टिप्पणी नहीं: