मालेगांव के अतिरिक्त जिलाधिकारी यशवंत सोनवणे को जलाकर मारने के विरोध में महाराष्ट्र के 20 लाख सरकारी कर्मचारी हड़ताल पर हैं. इस मामले से जुड़े सात आरोपियों को 8 फरवरी तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है. इस हत्याकांड में सभी 11 आरोपियों को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया था. पुलिस ने सोनवणे का मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया है. माना जा रहा है कि इस फोन से काफी सबूत मिल सकते हैं.
मनमाड पुलिस सूत्रों का कहना है कि एडीएम 11 कातिलों में से पांच के चेहरे उनके मोबाइल में कैद हैं. सूत्रों के मुताबिक मनमाड के पानेवाड़ी इलाके में पोपट शिंदे तेल शेड के पास एडिशनल कलक्टर यशवंत कुछ देर के लिए रुके थे. दाल में काला देखकर उन्होंने अपने मोबाइल फोन को रिकॉर्डिंग मोड पर डाल दिया.
यशवंत ने देखा कि पोपट शिंदे के इशारे पर पेट्रोल में मिलावट की जा रही है. यशवंत को इस बात की रिकॉर्डिंग करते देख वो आक्रोश में आ गए. फिर दोनों में हाथापाई हुई. इस बीच ये सारी तस्वीरें मोबाइल फोन में लगातार रिकॉर्ड होती रहीं. इसके बाद पोपट शिंदे और बाकी आरोपियों ने यशवंत के ऊपर मिट्टी के तेल डाल दिया और आग लगा दी. तब तक यशवंत ने अपना फोन निजी सचिव को दे दिया था. आरोपी निजी सचिव की तरफ दौड़े ज़रूर लेकिन वो वहां से किसी तरह जान बचाकर भागने में कामयाब रहे.
मुख्य आरोपी पोपट शिंदे भी इस घटना में 60-65 फीसदी झुलस गया. उसे अस्पताल में भर्ती किया गया है और उसकी हालत गम्भीर बताई जा रही है. इलाके के लोगों का कहना है कि बिना राजनीतिक शरण के तेल माफिया पनप नहीं सकता. मनमाड के इस इलाके में भी तेल डिपो से जुड़े तमाम लोग कई नेताओं के चेले हैं. समाजसेवी अन्ना हज़ारे इस मामले से इतने नाराज़ हैं कि उन्होंने अपना मौन व्रत तोड़कर दोषियों को सरेआम फांसी देने के लिए कह दिया. सोनवणे का परिवार मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहा है.

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