रिसर्व बैंक 25 जनवरी को जारी होने वाली अपनी तिमाही मौद्रिक नीति में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की घोषणा कर सकता है। इसके तहत रिजर्व बैंक रेपो और रिवर्स रेपो रेट में ०.२५ फीसदी तक की बढ़ोतरी कर सकता है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार लगातार बढ़ रही महंगाई के कारण यह कदम उठा सकता है। बाजार में नकदी की कमी भी बने रहने की संभावना है। वर्ष 2010 में रिजर्व बैंक ने छह बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। पिछले साल रेपो रेट में 1.50 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट में 2.0 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर चुका है। अभी रेपो रेट 6.25 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट 5.25 फीसदी है।
सरकार के लाख दावों के बावजूद महंगाई दिसंबर के महीने में भी उसके लक्ष्य से कही ज्यादा रही है। दिसंबर 2010 के दौरान मुद्रास्फीति जहां 8.4 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि रिजर्व बैंक के मुताबिक मुद्रास्फीति सामान्य स्तर पर 5-5.5 फीसदी के बीच रहती तो उचित होता। इसी के साथ-साथ बाजार में नकदी की कमी भी मार्च 2011 तक बनी रहने की संभावना है, जिसका असर भी आगामी मौद्रिक नीति में दिख सकता है।
एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरूआ के अनुसार घरेलू बाजार नें खाद्य कीमतें बढऩे के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी कमोडिटी उत्पादों की कीमतें बढ़ रही हैं। जिसका असर रिजर्व बैंक की नीतियों पर दिख सकता है। रिजर्व बैंक ने 2010 में पिछले साल के मुकाबले रेपो रेट में 1.50 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट में 2.0 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है। ऐसे में अनुमान है कि आगामी मौद्रिक नीति में रिजर्व बैंक रेपो और रिवर्स रेपो रेट दोनों में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। बरूआ के अनुसार सीआरआर में रिजर्व बैंक के बदलाव करने की उम्मीद नहीं है।
बाजार के जानकारों के अनुसार यदि रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति में ब्याज दरें बढ़ाता है तो भी मार्च तक महंगाई दर 6.5-7.0 फीसदी तक ही रहने की संभावना है, जो कि रिजर्व बैंक के लिए 5.5 फीसदी तक रहने के लक्ष्य से दूर है। इसके साथ ही बाजार में नकदी की समस्या भी उस वक्त तक बने रहने की संभावना है। मार्च 2011 तक बाजार में करीब 40,000 करोड़ रुपये की नगदी कम रहने की संभावना है।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड की मौद्रिक नीति पर जारी रिपोर्ट के अनुसार खाद्य महंगाई में उम्मीद से ज्यादा बढ़ोतरी होने से रिजर्व बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी दो चरणों में कर सकता है। इसके तहत 25 जनवरी को 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है, जबकि 0.50 फीसदी की बढ़ोतरी 2011 में ही बाद में कभी कर सकता है। पच्चीस जनवरी को पेश होने वाली मौद्रिक नीति के पहले सरकार के साथ-साथ रिजर्व बैंक के भी संकेत, महंगाई को नियंत्रण लाने के प्रयास हंै। ऐसे में ब्याज दरो में बढ़ोतरी होना लगभग तय माना जा रहा है।
सरकार के लाख दावों के बावजूद महंगाई दिसंबर के महीने में भी उसके लक्ष्य से कही ज्यादा रही है। दिसंबर 2010 के दौरान मुद्रास्फीति जहां 8.4 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि रिजर्व बैंक के मुताबिक मुद्रास्फीति सामान्य स्तर पर 5-5.5 फीसदी के बीच रहती तो उचित होता। इसी के साथ-साथ बाजार में नकदी की कमी भी मार्च 2011 तक बनी रहने की संभावना है, जिसका असर भी आगामी मौद्रिक नीति में दिख सकता है।
एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरूआ के अनुसार घरेलू बाजार नें खाद्य कीमतें बढऩे के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी कमोडिटी उत्पादों की कीमतें बढ़ रही हैं। जिसका असर रिजर्व बैंक की नीतियों पर दिख सकता है। रिजर्व बैंक ने 2010 में पिछले साल के मुकाबले रेपो रेट में 1.50 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट में 2.0 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है। ऐसे में अनुमान है कि आगामी मौद्रिक नीति में रिजर्व बैंक रेपो और रिवर्स रेपो रेट दोनों में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। बरूआ के अनुसार सीआरआर में रिजर्व बैंक के बदलाव करने की उम्मीद नहीं है।
बाजार के जानकारों के अनुसार यदि रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति में ब्याज दरें बढ़ाता है तो भी मार्च तक महंगाई दर 6.5-7.0 फीसदी तक ही रहने की संभावना है, जो कि रिजर्व बैंक के लिए 5.5 फीसदी तक रहने के लक्ष्य से दूर है। इसके साथ ही बाजार में नकदी की समस्या भी उस वक्त तक बने रहने की संभावना है। मार्च 2011 तक बाजार में करीब 40,000 करोड़ रुपये की नगदी कम रहने की संभावना है।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड की मौद्रिक नीति पर जारी रिपोर्ट के अनुसार खाद्य महंगाई में उम्मीद से ज्यादा बढ़ोतरी होने से रिजर्व बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी दो चरणों में कर सकता है। इसके तहत 25 जनवरी को 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है, जबकि 0.50 फीसदी की बढ़ोतरी 2011 में ही बाद में कभी कर सकता है। पच्चीस जनवरी को पेश होने वाली मौद्रिक नीति के पहले सरकार के साथ-साथ रिजर्व बैंक के भी संकेत, महंगाई को नियंत्रण लाने के प्रयास हंै। ऐसे में ब्याज दरो में बढ़ोतरी होना लगभग तय माना जा रहा है।

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