मशरूम पर शोध में लगे एक प्रमुख संस्थान ने एक विशेष प्रकार के मशरूम का विकास किया है जिसमें विभिन्न प्रकार के कैंसर बीमारी की रोकथाम की क्षमता है। साथ ही दवा कंपनी भी औषधी के रूप में इसका उपयोग कर सकती है।
हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित मशरूम अनुसंधान निदेशालय (डीएमआर) मशरूम की इस प्रजाति का विकास किया है। निदेशालय के मुताबिक औषधीय महत्व के कारण मंकी हेड मशरूम नाम की मशरूम की नई किस्म की काफी अहमियत है। यह विभिन्न प्रकार के कैंसर जैसी जैसी असाध्य बीमारी की रोकथाम करने में सक्षम है। निदेशालय के निदेशक मंजीत सिंह ने कहा कि हम जल्दी ही इसके औषधीय गुण की समीक्षा करेंगे और उसके बाद इसका व्यावसायीकरण किया जाएगा।
मशरूम अनुसंधान निदेशालय ने बताया कि इस प्रजाति के मशरूम को कुछ माह पहले गेहूं की भूसी में 20 से 25 डिग्री सेल्सियस के तापमान में उगाया गया है। मशरूम सर्वेक्षण के दौरान एकत्र की गई मशरूम फ्रूट बाडी से टिश्यू कल्चर के जरिये इस नई प्रजाति का विकास किया गया। यह निदेशालय भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के तत्वावधान में काम करता है जो केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संगठन है। मंजीत सिंह ने कहा कि विगत दो दशकों में मशरूम का उत्पादन 10,000 टन से बढ़कर एक लाख टन हो गया है। उन्होने कहा कि देश में कृषि कचड़ा (लगभग 60 करोड़ टन) का उत्पादन होता है। इसका उपयोग विभिन्न मशरूम के विकास में किया जा सकता है।
निदेशालय ने कहा कि यह विकास ओयस्टर मशरूम खेती के व्यावसायीकरण का भी रास्ता साफ करेगा। एक पोषक सब्जी के रूप में मशरूम को जाना जाता है। इसमें विटामिन बी12, फोलिक अम्ल तथा विटामिन डी जैसे पोषक तत्वों के अलावा रेशेदार तत्व और पोटेशियम भी मौजूद हैं। इसमें कॉलेस्ट्राल भी नहीं होता है। कम कैलोरी वाली यह सब्जी चिकनाई मुक्त है।
हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित मशरूम अनुसंधान निदेशालय (डीएमआर) मशरूम की इस प्रजाति का विकास किया है। निदेशालय के मुताबिक औषधीय महत्व के कारण मंकी हेड मशरूम नाम की मशरूम की नई किस्म की काफी अहमियत है। यह विभिन्न प्रकार के कैंसर जैसी जैसी असाध्य बीमारी की रोकथाम करने में सक्षम है। निदेशालय के निदेशक मंजीत सिंह ने कहा कि हम जल्दी ही इसके औषधीय गुण की समीक्षा करेंगे और उसके बाद इसका व्यावसायीकरण किया जाएगा।
मशरूम अनुसंधान निदेशालय ने बताया कि इस प्रजाति के मशरूम को कुछ माह पहले गेहूं की भूसी में 20 से 25 डिग्री सेल्सियस के तापमान में उगाया गया है। मशरूम सर्वेक्षण के दौरान एकत्र की गई मशरूम फ्रूट बाडी से टिश्यू कल्चर के जरिये इस नई प्रजाति का विकास किया गया। यह निदेशालय भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के तत्वावधान में काम करता है जो केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संगठन है। मंजीत सिंह ने कहा कि विगत दो दशकों में मशरूम का उत्पादन 10,000 टन से बढ़कर एक लाख टन हो गया है। उन्होने कहा कि देश में कृषि कचड़ा (लगभग 60 करोड़ टन) का उत्पादन होता है। इसका उपयोग विभिन्न मशरूम के विकास में किया जा सकता है।
निदेशालय ने कहा कि यह विकास ओयस्टर मशरूम खेती के व्यावसायीकरण का भी रास्ता साफ करेगा। एक पोषक सब्जी के रूप में मशरूम को जाना जाता है। इसमें विटामिन बी12, फोलिक अम्ल तथा विटामिन डी जैसे पोषक तत्वों के अलावा रेशेदार तत्व और पोटेशियम भी मौजूद हैं। इसमें कॉलेस्ट्राल भी नहीं होता है। कम कैलोरी वाली यह सब्जी चिकनाई मुक्त है।

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