देशद्रोह के मामले में उम्र कैद की सजा पाये मानवाधिकार कार्यकर्ता विनायक सेन की जमानत की अर्जी पर आज छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में सुनवाई होनी है। पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज के नेता विनायक सेन की अपील के मामले की सुनवाई में शामिल होने के लिए यूरोपीय संघ का आठ सदस्यीय दल वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी के साथ विमान से रविवार रात यहां पहुंचा।
रायपुर पहुंचते ही संघ के सदस्यों को अधिवक्ता संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और नागरिक मंच के सदस्यों के विरोध का सामना करना पड़ा। यूरोपीय संघ के विरोध में कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए और 'यूरोपीय संघ वापस जाओ' के नारे लगाए।
रायपुर पहुंचते ही संघ के सदस्यों को अधिवक्ता संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और नागरिक मंच के सदस्यों के विरोध का सामना करना पड़ा। यूरोपीय संघ के विरोध में कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए और 'यूरोपीय संघ वापस जाओ' के नारे लगाए।
विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना था कि यूरोपीय संघ के सदस्य पर्यवेक्षक के रूप में यहां आए हैं और वे कानून प्रक्रिया पर दबाव डालने की कोशिश करना चाहते हैं। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जेठमलानी ने कहा कि वह अपने पेशे का धर्म निभाने के लिए यहां आएं हैं। हालांकि इसके अलावा उन्होंने पत्रकारों के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। यूरोपीय संघ के सदस्यों के विरोध को देखते हुए यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस ने सदस्यों को हिफाजत के साथ होटल में पहुंचाया। होटल की सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है। सेन को निचली अदालत ने राजद्रोह के आरोप में उम्र कैद की सजा सुनाई है। उन्होंने इसके खिलाफ तथा जमानत के लिए बिलासपुर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है, जिस पर 24 जनवरी को सुनवाई होगी। संघ ने उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान पर्यवेक्षक रहने की बात कही है तथा भारत सरकार से इस संबंध में सहयोग मांगा है। बिलासपुर जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि कल विनायक मामले की सुनवाई होगी। इसे देखते हुए उच्च न्यायालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

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