जो दुखी हैं उनका हौसला बढ़ाओ| जो असहाय हैं
उनका उत्साहवर्धन करो| पीड़ितों के आंसू पोंछो|
प्रिय वाक्य बोलकर लोगों का दुःख दूर करो|
जब कोई निराश है उसे प्रसन्नचित्त करो|
ये भी दया और उदारता के विभिन्न रूप हैं|
(स्वामी शिवानन्द)
जो दुखी हैं उनका हौसला बढ़ाओ| जो असहाय हैं
उनका उत्साहवर्धन करो| पीड़ितों के आंसू पोंछो|
प्रिय वाक्य बोलकर लोगों का दुःख दूर करो|
जब कोई निराश है उसे प्रसन्नचित्त करो|
ये भी दया और उदारता के विभिन्न रूप हैं|
(स्वामी शिवानन्द)
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