
उच्चतम न्यायालय ने आज केरल के पूर्व उर्जा मंत्री और कांग्रेस नेता आर बालकृष्णन पिल्लई और दो अन्य लोगों को इदमलायर बांध भ्रष्टाचार मामले में एक साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई. न्यायमूर्ति पी सतशिवम और बी एस चौहान की खंडपीठ ने केरल उच्च न्यायालय द्वारा उन्हें बरी करने के आदेश को पलटते हुए पूर्व मंत्री को यह सजा सुनाई.
शीर्ष अदालत ने अभियोजन पक्ष की इस याचिका को मान लिया कि पूर्व मंत्री ने एक आपराधिक साजिश रची थी जिससे केरल राज्य बिजली बोर्ड को दो करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. मंत्री पर इदमलायर पनबिजली परियोजना के बिजली का सुरंग को बनाने का ठेका ठेकेदार पौलोस को असाधारण रूप से उंची दर पर देने का आरोप था.
उच्चतम न्यायालय ने उस समय के विपक्ष के नेता और वर्तमान मुख्यमंत्री वी एस अच्युतानंदन की अपील को स्वीकार कर लिया. अच्युतानंदन ने कहा था कि उच्च न्यायालय ने अभियोजन पक्ष द्वारा दिये गये क्रमबद्ध सबूतों को नकार कर तथा केरल की विशेष अदालत द्वारा अपराधी ठहराये जाने को अस्वीकार कर बडी गलती की है.
न्यायालय ने इस बात पर चिंता जताई कि देश में राजनीतिक हस्तियों से जुडे भ्रष्टाचार के मामले लंबे समय तक खिंच रहे हैं. उसने इस मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि यह घोटाला वर्ष 1982 में हुआ लेकिन सुनवाई वर्ष 1991 में शुरू हुई.
1 टिप्पणी:
चलो, किसी को सजा तो हुई।
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ब्लॉगवाणी: एक नई शुरूआत।
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