सीबीआई की विशेष अदालत ने आरुषि हत्याकांड में सीबीआई को लताड़ लगाते हुए कहा है कि इस मामले में तलवार दंपती के खिलाफ पर्याप्त सुबूत होने के बावजूद जांच एजेंसी ने क्लोजर रिपोर्ट क्यों पेश की जबकि उन्हें चार्जशीट दाखिल करनी चाहिए थी। सीबीआई की विशेष अदालत में जज ने कहा कि जब सुबूतों की कड़ियां साफ तौर पर तलवार दंपती की तरफ इशारा करती हैं तो उनके खिलाफ चार्जशीट क्यों नहीं दाखिल की गई। वहीं, सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में एक नए गवाह सोहरत का नाम लिया है। सीबीआई का कहना है कि सोहरत को राजेश तलवार ने आरुषि के कमरे और उनके कमरे के बीच के पार्टिशन को पेंट करने के लिए कहा था।
आरुषि तलवार हत्याकांड में सीबीआई की विशेष अदालत ने डॉ. राजेश तलवार और डॉ. नूपुर तलवार को आरोपी बताते हुए मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। दरअसल, अदालत के सामने पेश क्लोजर रिपोर्ट में सीबीआई ने कहा है कि डॉ. राजेश तलवार के खिलाफ कई परिस्थितिजन्य सुबूत हैं, लेकिन कोई ठोस सुबूत नहीं है। सीबीआई की दलील है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपनी थ्योरी में कहा था कि राजेश तलवार ने गुस्से में आकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया है। इसी आधार पर तलवार की गिरफ्तारी भी की गई थी।
तलवार दंपती ने एक बयान में कहा था कि आरुषि के कमरे के दरवाजे को रात में वह लॉक करते थे उसकी चाबी नूपुर अपने पास रखती थीं। घटना के बाद चाबी लॉबी में मिली और आरुषि के कमरे का दरवाजा खुला हुआ मिला। सीबीआई के इस सवाल का तलवार दंपती के पास कोई जवाब नहीं था कि आरुषि का दरवाजा कैसे खुला? सीबीआई की दलील है कि कमरा या तो तलवार दंपती ने खोला या फिर आरुषि ने खुद खोला था। आरुषि के मोबाइल से डेटा को डिलीट कर दिया गया था। ऐसा काम कोई सामान्य अपराधी नहीं कर सकता था।आरुषि का गला सर्जिकल हथियार से किसी ट्रेंड शख्स द्वारा काटा गया था इस आधार पर तलवार दंपति की ओर शक जाता है। राजेश तलवार के भाई ने डॉक्टर से कहा था कि वह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में रेप का जिक्र न करें। शुरुआत में गायब गोल्फ स्टिक के मिलने पर तलवार दंपती ने इसके बारे में नहीं बताया। सीबीआई की दलील है कि आरुषि और हेमराज को पहले गोल्फ स्टिक से मारा गया और फिर धारदार हथियार से उनका गला रेता गया। सीबीआई का कहना है कि गोल्फ स्टिक से दोनों को मारा गया, इससे साबित होता है कि यह घटना अचानक गुस्से और उत्तेजना में हुआ।
घटना के बाद सुबह नौकरानी जब घर आई तो दरवाजा बाहर से लॉक से था। नूपुर तलवार ने घर की चाबी बालकनी से बाहर फेंकी। इसके बाद नौकरानी घर में दाखिल हुई। तभी तलवार दंपती को पता चला कि आरुषि की हत्या कर दी गई है और हेमराज गायब है। इसके बाद तलवार दंपती ने नौकरों से कहा, देखो हेमराज क्या करके गया है? इसके बाद दोस्तों और पुलिस को जानकारी दी गई। जानकार यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या एविडेंस एक्ट-८ में घटना के पहले और उसके बाद आरोपी के बर्ताव को देखा जाता है। आरुषि की हत्या के बाद सुबह जब नौकरानी आई और तलवार दंपती को इस घटना के बारे में पता चला तो उन्होंने कहा कि देखो हेमराज क्या करके गया। ऐसे में जानकार यह सवाल पूछ रहे हैं कि नूपुर को कैसे पता चला कि हेमराज ने ही आरुषि की हत्या की है। एविडेंस एक्ट में यह भी प्रावधान है कि हत्या के केस में साथ रहने वाले शख्स की जिम्मेदारी बनती है कि वह बताए कि उसे घटना के बारे में कैसे नहीं पता चला। इस मामले में ऐसे कई सुबूत हैं, जिनसे राजेश और नूपुर के इस मामले में शामिल होने का शक पुख्ता होता है।
घटना के बाद जब उत्तर प्रदेश पुलिस मौके पर पहुंची और उसने आरुषि के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। उसी वक्त तलवार परिवार के दोस्तों ने सीढ़ियों पर खून के धब्बे देखे, लेकिन छत का दरवाजा लॉक था। राजेश तलवार को छत की चाबी देने को कहा गया, लेकिन उन्होंने इस बात को अनसुना कर दिया। पुलिस ने भी खून के धब्बे देखे, लेकिन उन्होंने दरवाजा नहीं खोला। उसी वक्त तलवार ने कहा कि पुलिस अपना समय बर्बाद न करे और हेमराज का पता लगाए। आरुषि के पोस्टमॉर्टम के बाद उसका अंतिम संस्कार हुआ। अगले दिन तलवार दंपति आरुषि की अस्थियां लेकर हरिद्वार गए। उसी दिन यूपी पुलिस के रिटायर्ड डीएसपी केके गौतम ने सीढ़ियों पर लगे खून के निशान के आधार पर शक जाहिर किया। फिर नोएडा पुलिस ने छत का दरवाजा तोड़ा और हेमराज का शव बरामद किया गया। लेकिन डॉ. राजेश ने हेमराज का शव पहचानने से इनकार कर दिया। सीबीआई की दलील है कि ये सभी तथ्य राजेश तलवार की तरफ इशारा करते हैं। सीबीआई का कहना है कि घटना के बाद जब पुलिस पहुंची तो सीढ़ियों पर खून के धब्बे दिखे। लेकिन पुलिस ने धब्बे देखकर तुरंत छत का दरवाजा नहीं तोड़ा। बाद में इन्हीं धब्बों के आधार पर छत का दरवाजा तोड़ा गया और हेमराज की लाश बरामद की गई। लेकिन सवाल उठता है कि पुलिस ने पहले ही दिन दरवाजा क्यों नहीं तोड़ा गया? मौका-ए-वारदात की गहन छानबीन करने का बुनियादी काम पुलिस ने क्यों नहीं किया?
सीबीआई का कहना है कि घटना के बाद आरुषि के पिता राजेश तलवार ने यूपी पुलिस से कहा कि पुलिस मौके पर वक्त बर्बाद न करे और उनके नौकर की तलाश करे। जानकार सवाल उठा रहे हैं कि हत्या जैसे मामलों में शिकायत करने वाले का बयान लेना पुलिस का काम है, लेकिन मामले की छानबीन कैसे की जाए, यह शिकायत करने वाला नहीं बता सकता है। सीबीआई का दावा है कि राजेश तलवार के घर में दो गोल्फ स्टिक थीं और घटना के बाद मौके से एक गोल्फ स्टिक गायब थी। गायब हुई स्टिक बाद में मिली लेकिन तलवार परिवार ने इसकी जानकारी नहीं दी। पुलिस या मामले की जांच कर रही सीबीआई को अगर लगा कि गोल्फ स्टिक से वारदात को अंजाम दिया गया होगा तो उन्होंने इस बारे में पूछताछ क्यों नहीं की। जब तलवार को सीबीआई ने रिमांड पर लिया तो गोल्फ स्टिक के बारे में पूछताछ क्यों नहीं की गई।
कानूनी जानकारों का मानना है कि हत्या जैसे संगीन अपराध का मामला परिस्थितिजन्य सुबूतों पर आधारित हो तो सुबूतों की कड़ियां जोड़नी पड़ती हैं। इसमें हत्या के पीछे मकसद, हत्या में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी और मौका-ए-वारदात पर मौजूद आखिरी मंजर को एक कड़ी के तौर पेश करना होता है। इस मामले में हत्या का मकसद आज तक साफ नहीं हो पाया है और हत्या में इस्तेमाल हथियार और औजार का भी कोई सुराग नहीं लग सका है। ऐसे में सीबीआई के लिए कोर्ट में मामले की कड़ियां जोड़ना आसान नहीं होगा और यह सवाल तलवार दंपती की वकील कोर्ट में उठा सकती हैं। सीबीआई का कहना है कि राजेश तलवार ने आरुषि के अंतिम संस्कार के बाद घर के नौकरों से घर की दीवारों पर लगे खून के धब्बों को साफ करवा दिया। सवाल उठता है कि मौका-ए-वारदात को तुरंत सील करने का काम जांच एजेंसी का है ताकि सुबूतों को बचाया जा सके। पुलिस की मौजूदगी में तलवार परिवार के घर की सफाई होना पुलिस के ऊपर गंभीर सवाल उठाती है।
अहम सवाल यह भी है कि मौका-ए-वारदात पर मौजूद सुबूतों को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस ने निर्देश क्यों नहीं दिए। अगर पुलिस के निर्देश के बावजूद उसका पालन नहीं हुआ तो उसके लिए अलग से मामला बनता है। लेकिन आरुषि के मामले में ऐसा नहीं हुआ। इसका एक मतलब यह भी निकला जा सकता है कि घर की सफाई पुलिस की सहमति से हुई क्योंकि ऐसी सहमति के लिए किसी लिखित आदेश की जरूरत नहीं थी।
आरुषि तलवार हत्याकांड में सीबीआई की विशेष अदालत ने डॉ. राजेश तलवार और डॉ. नूपुर तलवार को आरोपी बताते हुए मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। दरअसल, अदालत के सामने पेश क्लोजर रिपोर्ट में सीबीआई ने कहा है कि डॉ. राजेश तलवार के खिलाफ कई परिस्थितिजन्य सुबूत हैं, लेकिन कोई ठोस सुबूत नहीं है। सीबीआई की दलील है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपनी थ्योरी में कहा था कि राजेश तलवार ने गुस्से में आकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया है। इसी आधार पर तलवार की गिरफ्तारी भी की गई थी।
तलवार दंपती ने एक बयान में कहा था कि आरुषि के कमरे के दरवाजे को रात में वह लॉक करते थे उसकी चाबी नूपुर अपने पास रखती थीं। घटना के बाद चाबी लॉबी में मिली और आरुषि के कमरे का दरवाजा खुला हुआ मिला। सीबीआई के इस सवाल का तलवार दंपती के पास कोई जवाब नहीं था कि आरुषि का दरवाजा कैसे खुला? सीबीआई की दलील है कि कमरा या तो तलवार दंपती ने खोला या फिर आरुषि ने खुद खोला था। आरुषि के मोबाइल से डेटा को डिलीट कर दिया गया था। ऐसा काम कोई सामान्य अपराधी नहीं कर सकता था।आरुषि का गला सर्जिकल हथियार से किसी ट्रेंड शख्स द्वारा काटा गया था इस आधार पर तलवार दंपति की ओर शक जाता है। राजेश तलवार के भाई ने डॉक्टर से कहा था कि वह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में रेप का जिक्र न करें। शुरुआत में गायब गोल्फ स्टिक के मिलने पर तलवार दंपती ने इसके बारे में नहीं बताया। सीबीआई की दलील है कि आरुषि और हेमराज को पहले गोल्फ स्टिक से मारा गया और फिर धारदार हथियार से उनका गला रेता गया। सीबीआई का कहना है कि गोल्फ स्टिक से दोनों को मारा गया, इससे साबित होता है कि यह घटना अचानक गुस्से और उत्तेजना में हुआ।
घटना के बाद सुबह नौकरानी जब घर आई तो दरवाजा बाहर से लॉक से था। नूपुर तलवार ने घर की चाबी बालकनी से बाहर फेंकी। इसके बाद नौकरानी घर में दाखिल हुई। तभी तलवार दंपती को पता चला कि आरुषि की हत्या कर दी गई है और हेमराज गायब है। इसके बाद तलवार दंपती ने नौकरों से कहा, देखो हेमराज क्या करके गया है? इसके बाद दोस्तों और पुलिस को जानकारी दी गई। जानकार यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या एविडेंस एक्ट-८ में घटना के पहले और उसके बाद आरोपी के बर्ताव को देखा जाता है। आरुषि की हत्या के बाद सुबह जब नौकरानी आई और तलवार दंपती को इस घटना के बारे में पता चला तो उन्होंने कहा कि देखो हेमराज क्या करके गया। ऐसे में जानकार यह सवाल पूछ रहे हैं कि नूपुर को कैसे पता चला कि हेमराज ने ही आरुषि की हत्या की है। एविडेंस एक्ट में यह भी प्रावधान है कि हत्या के केस में साथ रहने वाले शख्स की जिम्मेदारी बनती है कि वह बताए कि उसे घटना के बारे में कैसे नहीं पता चला। इस मामले में ऐसे कई सुबूत हैं, जिनसे राजेश और नूपुर के इस मामले में शामिल होने का शक पुख्ता होता है।
घटना के बाद जब उत्तर प्रदेश पुलिस मौके पर पहुंची और उसने आरुषि के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। उसी वक्त तलवार परिवार के दोस्तों ने सीढ़ियों पर खून के धब्बे देखे, लेकिन छत का दरवाजा लॉक था। राजेश तलवार को छत की चाबी देने को कहा गया, लेकिन उन्होंने इस बात को अनसुना कर दिया। पुलिस ने भी खून के धब्बे देखे, लेकिन उन्होंने दरवाजा नहीं खोला। उसी वक्त तलवार ने कहा कि पुलिस अपना समय बर्बाद न करे और हेमराज का पता लगाए। आरुषि के पोस्टमॉर्टम के बाद उसका अंतिम संस्कार हुआ। अगले दिन तलवार दंपति आरुषि की अस्थियां लेकर हरिद्वार गए। उसी दिन यूपी पुलिस के रिटायर्ड डीएसपी केके गौतम ने सीढ़ियों पर लगे खून के निशान के आधार पर शक जाहिर किया। फिर नोएडा पुलिस ने छत का दरवाजा तोड़ा और हेमराज का शव बरामद किया गया। लेकिन डॉ. राजेश ने हेमराज का शव पहचानने से इनकार कर दिया। सीबीआई की दलील है कि ये सभी तथ्य राजेश तलवार की तरफ इशारा करते हैं। सीबीआई का कहना है कि घटना के बाद जब पुलिस पहुंची तो सीढ़ियों पर खून के धब्बे दिखे। लेकिन पुलिस ने धब्बे देखकर तुरंत छत का दरवाजा नहीं तोड़ा। बाद में इन्हीं धब्बों के आधार पर छत का दरवाजा तोड़ा गया और हेमराज की लाश बरामद की गई। लेकिन सवाल उठता है कि पुलिस ने पहले ही दिन दरवाजा क्यों नहीं तोड़ा गया? मौका-ए-वारदात की गहन छानबीन करने का बुनियादी काम पुलिस ने क्यों नहीं किया?
सीबीआई का कहना है कि घटना के बाद आरुषि के पिता राजेश तलवार ने यूपी पुलिस से कहा कि पुलिस मौके पर वक्त बर्बाद न करे और उनके नौकर की तलाश करे। जानकार सवाल उठा रहे हैं कि हत्या जैसे मामलों में शिकायत करने वाले का बयान लेना पुलिस का काम है, लेकिन मामले की छानबीन कैसे की जाए, यह शिकायत करने वाला नहीं बता सकता है। सीबीआई का दावा है कि राजेश तलवार के घर में दो गोल्फ स्टिक थीं और घटना के बाद मौके से एक गोल्फ स्टिक गायब थी। गायब हुई स्टिक बाद में मिली लेकिन तलवार परिवार ने इसकी जानकारी नहीं दी। पुलिस या मामले की जांच कर रही सीबीआई को अगर लगा कि गोल्फ स्टिक से वारदात को अंजाम दिया गया होगा तो उन्होंने इस बारे में पूछताछ क्यों नहीं की। जब तलवार को सीबीआई ने रिमांड पर लिया तो गोल्फ स्टिक के बारे में पूछताछ क्यों नहीं की गई।
कानूनी जानकारों का मानना है कि हत्या जैसे संगीन अपराध का मामला परिस्थितिजन्य सुबूतों पर आधारित हो तो सुबूतों की कड़ियां जोड़नी पड़ती हैं। इसमें हत्या के पीछे मकसद, हत्या में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी और मौका-ए-वारदात पर मौजूद आखिरी मंजर को एक कड़ी के तौर पेश करना होता है। इस मामले में हत्या का मकसद आज तक साफ नहीं हो पाया है और हत्या में इस्तेमाल हथियार और औजार का भी कोई सुराग नहीं लग सका है। ऐसे में सीबीआई के लिए कोर्ट में मामले की कड़ियां जोड़ना आसान नहीं होगा और यह सवाल तलवार दंपती की वकील कोर्ट में उठा सकती हैं। सीबीआई का कहना है कि राजेश तलवार ने आरुषि के अंतिम संस्कार के बाद घर के नौकरों से घर की दीवारों पर लगे खून के धब्बों को साफ करवा दिया। सवाल उठता है कि मौका-ए-वारदात को तुरंत सील करने का काम जांच एजेंसी का है ताकि सुबूतों को बचाया जा सके। पुलिस की मौजूदगी में तलवार परिवार के घर की सफाई होना पुलिस के ऊपर गंभीर सवाल उठाती है।
अहम सवाल यह भी है कि मौका-ए-वारदात पर मौजूद सुबूतों को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस ने निर्देश क्यों नहीं दिए। अगर पुलिस के निर्देश के बावजूद उसका पालन नहीं हुआ तो उसके लिए अलग से मामला बनता है। लेकिन आरुषि के मामले में ऐसा नहीं हुआ। इसका एक मतलब यह भी निकला जा सकता है कि घर की सफाई पुलिस की सहमति से हुई क्योंकि ऐसी सहमति के लिए किसी लिखित आदेश की जरूरत नहीं थी।

2 टिप्पणियां:
आश्चर्य होता है कानून को किस तरह तोड़ा मरोड़ा जाता है.
देखते हैं कब अंजाम तक पहुंचता है यह मामला।
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ब्लॉगवाणी: एक नई शुरूआत।
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