मिट्टी के तेल, रसोई गैस और खाद की सब्सिडी सीधे गरीबों को पहुंचाने के लिए सरकार ने एक टॉस्क फोर्स का गठन किया है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूएआईडीएआई) के चेयरमैन नंदन नीलेकणी की अगुआई में गठित यह कार्यबल सब्सिडी पाने के हकदार व्यक्तियों और परिवारों तक सीधे छूट पहुंचाने का उपयुक्त तंत्र सुझाएगा।
दल वर्तमान में सब्सिडी दिए जाने के तरीके में संशोधन सुझाएगा, जिसके उपयोग से सब्सिडी वितरण के तंत्र से बिचौलियों को हटाकर सीधे व्यक्तियों और परिवारों को छूट राशि दी जाएगी। इस काम के लिए टॉस्क फोर्स एक उचित सूचना-प्रौद्योगिकी तंत्र का विकास भी करेगा जो विशिष्ट पहचान संख्या से जुड़ा होगा और साथ ही प्रशासन और आपूर्ति चेन व्यवस्था में जरूरी परिवर्तन लाएगा।
नीलेकणी के अलावा इस कार्यबल में वित्त मंत्रालय के व्यय और वित्तीय सेवाओं के सचिव, रसायन व खाद, कृषि, खाद्य व सार्वजनिक वितरण, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस तथा ग्रामीण विकास के सचिव शामिल हैं। सरकार ने टॉस्क फोर्स से रिपोर्ट को चार महीने में तैयार करने को कहा है। तीनों सब्सिडियों का वितरण करने वाले मंत्रालयों द्वारा रिपोर्ट में दी गई अनुशंसाओं को पायलट आधार पर छह महीने तक लागू किया जाएगा। मंत्रालयों द्वारा लागू किए गए पायलट प्रोजेक्ट की अंतरिम रिपोर्ट को देने के बाद फील्ड में लागू करने के लिए टॉस्क फोर्स अंतिम रिपोर्ट देगा।
सरकार रियायती दामों पर मिट्टी का तेल बीपीएल परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए देती है। सरकार के पास रिपोर्ट है कि वितरण किए जाने वाले इस तेल की काफी मात्रा चोरी हो जाती है और मिलावटी धंधे में इस्तेमाल की जाती है। सूत्रों ने बताया कि इन्हीं मुद्दों के मद्देनजर सरकार ने इस टास्क फोर्स का गठन किया है ताकि मौजूदा तंत्र में सुधार किया जा सके। इसी तरह से रियायती दरों पर रसोई गैस सिलेंडर दिए जाने का मुद्दा भी सरकार के सामने है। खाद्य सब्सिडी का बोझ सरकार के लिए पहले से ही सिरदर्द बना हुआ है।
दल वर्तमान में सब्सिडी दिए जाने के तरीके में संशोधन सुझाएगा, जिसके उपयोग से सब्सिडी वितरण के तंत्र से बिचौलियों को हटाकर सीधे व्यक्तियों और परिवारों को छूट राशि दी जाएगी। इस काम के लिए टॉस्क फोर्स एक उचित सूचना-प्रौद्योगिकी तंत्र का विकास भी करेगा जो विशिष्ट पहचान संख्या से जुड़ा होगा और साथ ही प्रशासन और आपूर्ति चेन व्यवस्था में जरूरी परिवर्तन लाएगा।
नीलेकणी के अलावा इस कार्यबल में वित्त मंत्रालय के व्यय और वित्तीय सेवाओं के सचिव, रसायन व खाद, कृषि, खाद्य व सार्वजनिक वितरण, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस तथा ग्रामीण विकास के सचिव शामिल हैं। सरकार ने टॉस्क फोर्स से रिपोर्ट को चार महीने में तैयार करने को कहा है। तीनों सब्सिडियों का वितरण करने वाले मंत्रालयों द्वारा रिपोर्ट में दी गई अनुशंसाओं को पायलट आधार पर छह महीने तक लागू किया जाएगा। मंत्रालयों द्वारा लागू किए गए पायलट प्रोजेक्ट की अंतरिम रिपोर्ट को देने के बाद फील्ड में लागू करने के लिए टॉस्क फोर्स अंतिम रिपोर्ट देगा।
सरकार रियायती दामों पर मिट्टी का तेल बीपीएल परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए देती है। सरकार के पास रिपोर्ट है कि वितरण किए जाने वाले इस तेल की काफी मात्रा चोरी हो जाती है और मिलावटी धंधे में इस्तेमाल की जाती है। सूत्रों ने बताया कि इन्हीं मुद्दों के मद्देनजर सरकार ने इस टास्क फोर्स का गठन किया है ताकि मौजूदा तंत्र में सुधार किया जा सके। इसी तरह से रियायती दरों पर रसोई गैस सिलेंडर दिए जाने का मुद्दा भी सरकार के सामने है। खाद्य सब्सिडी का बोझ सरकार के लिए पहले से ही सिरदर्द बना हुआ है।

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