जिस प्रकार दहकते कोयले की लालिमा
से अग्नि का भान होता है, उसी प्रकार
शरीर की सुन्दर कार्यशैली से आत्मा
की उपस्थिति का भान होता है|
(श्री परमहंस योगानंद)
जिस प्रकार दहकते कोयले की लालिमा
से अग्नि का भान होता है, उसी प्रकार
शरीर की सुन्दर कार्यशैली से आत्मा
की उपस्थिति का भान होता है|
(श्री परमहंस योगानंद)
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