आरुषी केस : सी बी आई की अपील ख़ारिज. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 9 फ़रवरी 2011

आरुषी केस : सी बी आई की अपील ख़ारिज.

नूपुर और राजेश तलवार को उनकी बेटी आरुषि की हत्या के मामले में आरोपी बनाया गया है. विशेष अदालत ने ढाई साल पुराने इस मामले को बंद करने की सीबीआई की अपील को खारिज कर दिया है.

जज प्रीती सिंह ने केस को बंद करने की मांग करने वाली सीबीआई की रिपोर्ट का संज्ञान लिया और आरूषि के माता पिता को 28 फरवरी को अदालत में हाजिर होने का निर्देश दिया. उन्हें हत्या, सबूत मिटाने, षडयंत्र और आपराधिक इरादों के मामले में आरोपी बनाया गया है. अदालत ने सीबीआई की रिपोर्ट के खिलाफ दायर राजेश तलवार की याचिका को खारिज कर दिया और मामले में नए सिरे से जांच करने को कहा है.

पेशे से दांतों के डॉक्टर तलवार दंपत्ति को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 201 (सबूत मिटाने) और 34 (साझा तौर पर अपराध करने) के तहत आरोपी बनाय गया है. सीबीआई ने मंगवलार को कहा कि परिस्थितिजन्य सबूतों से संकेत मिलता है कि तलवार दंपत्ति अपनी बेटी और नौकर हेमराज की हत्या में शामिल है. सीबीआई के वकील आरके सैनी का कहना है, "हमारा रुख यह है कि जांच से साबित होता है कि आरूषि और हेमराज की हत्या में कोई बाहरी व्यक्ति शामिल नहीं था. नौकर इसमें शामिल नहीं थे. पारिस्थितिजन्य सबूतों से संकेत मिलता है कि जो भी किया गया उसमें माता पिता के अलावा कोई और शामिल नहीं था."

लेकिन तलवार दंपत्ति की वकील रिबेका जॉन ने कहा कि विशेष अदालत के इस आदेश के खिलाफ बड़ी अदालत में अपील की जाएगी. उनका कहना है, "आप लोग (संभवतः मीडिया) ऐसा माहौल बनाते हैं और फिर यह होता है. इस देश में एक कानून है. हम बड़ी अदालत में इस फैसले को चुनौती देने के बारे में सोच रहे हैं. यह अंतिम फैसला नहीं है."

14 वर्षीय आरूषि 2008 में नोएडा के अपने घर में मृत पाई गई. घर में काम करने वाले नौकर हेमराज का शव भी एक दिन बाद छत पर मिला. तलवार दंपत्ति के अन्य वकील सतीश टमता सीबीआई की जांच में गंभीर चूकों का आरोप लगाते हैं. वह कहते हैं, "अपनी दलील में हमने इस बात की तरफ ध्यान दिलाने की कोशिश की है कि जांच के दौरान कुछ चूकों पर स्पष्टीकरण दिए जाने की जरूरत है और जांच यहीं नहीं रोकी जा सकती. इस मामले में और वैज्ञानिक जांच की जरूरत है."

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