प्रवर्तन निदेशालय ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोडा और उनके सहायकों की करीब 130 करोड़ रूपये मूल्य की संपत्ति जब्त करने की तैयारी कर रहा है. कोडा और उनके सहायकों के खिलाफ गैरकानूनी तरीके से विशाल राशि के निवेश और हवाला के जरिये लेनदेन करने के आरोपों की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय को राष्ट्रीय राजधानी में धन शोधन निरोधक अधिनियम (पीएमएल) के तहत संबद्ध प्राधिकारी से उनकी संपत्ति जब्त करने की अनुमति मिल गई है.
सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय को मिला यह पहला आदेश है तथा आरोपियों की और संपत्तियां भी जब्त की जा सकती हैं. प्रवर्तन निदेशालय ने आरोपियों की जितनी संपत्ति की पहचान की है उसकी कीमत 200 करोड़ रूपये से अधिक बताई जाती है. उन्होंने बताया कि पीएमएलए के तहत संपत्ति को अपराध से हुआ फायदा मानते हुए उसे जब्त करना, एक कदम है. प्रवर्तन निदेशालय ने जिन संपत्तियों का पता लगाया है वह झारखंड और बिहार में हैं. उन्हें सील कर दिया जाएगा तथा उनकी बिक्री और खरीदी पर रोक संबंधी आदेश जारी किया जाएगा. ऐसा इसलिए किया जाएगा क्योंकि इन संपत्तियों के स्वामियों कोड़ा और उनके सहयोगियों के खिलाफ जांच चल रही है.
इस मामले में जो संपत्तियां जब्त की जानी हैं, उनमें कुछ संपत्ति कोडा के सहयोगियों विनोद और विकास सिन्हा की भी हैं. ये दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. प्रवर्तन निदेशालय ने चार मार्च को रांची में एक विशेष अदालत में कोडा के खिलाफ एक आरोपपत्र दाखिल किया था. आरोपपत्र में उन पर मुंबई स्थित एक कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी सहित चार करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से 1,340 करोड़ रूपये से अधिक मूल्य की अवैध संपत्ति रखने का आरोप लगाया गया है.
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में अवैध निवेशों की जांच करने के लिए दुबई, स्वीडन, थाईलैंड, इंडोनेशिया और लाइबेरिया जैसे देशों को 'आग्रह पत्र' (एलआरएस) भेजे थे. अब निदेशालय को इन देशों के जवाब का इंतजार है. कथित अवैध निवेश के बारे में कोडा और उनके सहयोगियों से आयकर विभाग, सीबीआई और झारखंड सतर्कता ब्यूरो जैसी विभिन्न जांच एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं.
सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय को मिला यह पहला आदेश है तथा आरोपियों की और संपत्तियां भी जब्त की जा सकती हैं. प्रवर्तन निदेशालय ने आरोपियों की जितनी संपत्ति की पहचान की है उसकी कीमत 200 करोड़ रूपये से अधिक बताई जाती है. उन्होंने बताया कि पीएमएलए के तहत संपत्ति को अपराध से हुआ फायदा मानते हुए उसे जब्त करना, एक कदम है. प्रवर्तन निदेशालय ने जिन संपत्तियों का पता लगाया है वह झारखंड और बिहार में हैं. उन्हें सील कर दिया जाएगा तथा उनकी बिक्री और खरीदी पर रोक संबंधी आदेश जारी किया जाएगा. ऐसा इसलिए किया जाएगा क्योंकि इन संपत्तियों के स्वामियों कोड़ा और उनके सहयोगियों के खिलाफ जांच चल रही है.
इस मामले में जो संपत्तियां जब्त की जानी हैं, उनमें कुछ संपत्ति कोडा के सहयोगियों विनोद और विकास सिन्हा की भी हैं. ये दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. प्रवर्तन निदेशालय ने चार मार्च को रांची में एक विशेष अदालत में कोडा के खिलाफ एक आरोपपत्र दाखिल किया था. आरोपपत्र में उन पर मुंबई स्थित एक कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी सहित चार करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से 1,340 करोड़ रूपये से अधिक मूल्य की अवैध संपत्ति रखने का आरोप लगाया गया है.
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में अवैध निवेशों की जांच करने के लिए दुबई, स्वीडन, थाईलैंड, इंडोनेशिया और लाइबेरिया जैसे देशों को 'आग्रह पत्र' (एलआरएस) भेजे थे. अब निदेशालय को इन देशों के जवाब का इंतजार है. कथित अवैध निवेश के बारे में कोडा और उनके सहयोगियों से आयकर विभाग, सीबीआई और झारखंड सतर्कता ब्यूरो जैसी विभिन्न जांच एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं.

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