कुछ भारतीय खिलाड़ियों के बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (बीडब्ल्यूएफ) द्वारा सभी महिला खिलाड़ियों को खेलते समय स्कर्ट पहनना अनिवार्य किए जाने का विरोध करने के बाद, अब राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस निर्णय को प्रतिक्रियावादी और पुरुषों की मानसिकता का असर बताया है।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने इसे गलत बताते हुए कहा है कि वे इसका विरोध करेंगीं और यदि जरुरत पड़ी तो बैडमिंटन फेडरेशन को भी लिखेंगे। महिला आयोग की कार्यकारी अध्यक्ष यास्मीन अबरार ने कहा कि खेल को आकर्षक बनाने के लिए महिला खिलाड़ियों को स्कर्ट पहनने के निर्देश देना पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि खेल को खेल की ही तरह देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खेल के दौरान जरूरी है कि खिलाड़ी कैसे खेलता है, न कि वह क्या पहना हुआ है।
बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन ने महिला खिलाड़ियों के लिए नया ड्रेस कोड लागू किया है। इस आदेश के अनुसार १ मई से सभी खिलाड़ियों को स्कर्ट पहनना जरूरी है। खिलाड़ी शार्ट्स पहन सकती हैं, लेकिन स्कर्ट भी पहनना अनिवार्य है। भारत की जानी मानी खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा ने कहा कि यह सभी खेल में ग्लैमर और बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्कर्ट पहनना जरूरी नहीं होना चाहिए इससे खिलाड़ी खेल के दौरान स्वतंत्रता से नहीं खेल सकेंगीं। आठ बार महिला एकल चैंपियन रहीं मधुमिता बिष्ट ने भी इस नियम का विरोध किया है।

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