अमरीका ने पाकिस्तान से कहा है कि वो चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैबा के ख़िलाफ़ उठाए जा रहे क़दमों मे इज़ाफ़ा करे.लश्कर को 2008 में मुंबई हमलों के लिए भी ज़िम्मेदार माना जाता है. पाकिस्तान के क़बायली इलाक़ों को चरमपंथियों की पनाहगाह क़रार देते हुए एक वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी ने कहा कि ओबामा प्रशासन पाकिस्तान पर लगातार दबाव बना रहा है कि वो लश्कर-ए-तैबा के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे.
अमरीकी विदेश मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले आतंकवाद निरोधक कार्यालय के संयोजक डैनियल बेन्जामिन ने अमरीकी संसदीय समिति के सामने दिए गए अपने बयान में ये बातें कहीं.
डैनियल बेन्जामिन का कहना था,'' हालाकि आतंकवाद पर क़ाबू पाने के मामले में पाकिस्तान ने काफ़ी हद तक कामयाबी पाई है ख़ासकर तहरीक-ए-तालिबान के मामले, लेकिन इस सफलता को लंबे समय तक क़ायम रखना असल चुनौती है.''
बेंजामिन डैनियल ने कहा की वे पाकिस्तान पर लगातार इस बात के लिए दबाव बना रहें है कि वो लश्कर-ए-तैबा और दूसरे चरमपंथी संगठनो पर और अधिक कार्रवाई करे.''
बेन्जामिन ने कहा कि अपने पश्चिमी सीमा के क़बायली इलाक़े में अल-क़ायदा को सुरक्षित ठिकाना बनाने से रोकने के लिए पाकिस्तान को लगातार प्रयास करते रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि अमरीका लगातार पाकिस्तान से कह रहा है कि वो लश्कर-ए-तैबा के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे. इस बारे में बेन्जामिन का कहना था,''हमलोग पाकिस्तान पर लगातार इस बात के लिए दबाव बना रहें है कि वो लश्कर-ए-तैबा और दूसरे चरमपंथी संगठनो पर और अधिक कार्रवाई करे.''
अल-क़ायदा के बारे में बेन्जामिन ने कहा कि हालाकि ये सगठन अंदर से काफ़ी कमज़ोर हो गया है लेकिन अभी भी इसके पास क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमला करने की क्षमता बाक़ी है. उन्होंने यह भी कहा कि अल-क़ायदा से ज़ुड़े हुए दूसरे संगठन और मज़बूत हुए हैं. बेन्जामिन ने कहा कि पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में सक्रिय कई चरमपंथी संगठन अभी भी पाकिस्तान के उत्तरी पश्चिम में फ़ाटा औऱ ख़ैबर पख्तूखां प्रांत में अपना ठिकाना बनाए हुए हैं

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