भारत-पाकिस्तान संबंध सुधारने को प्रतिबद्ध. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

रविवार, 17 अप्रैल 2011

भारत-पाकिस्तान संबंध सुधारने को प्रतिबद्ध.

भारत-पाकिस्तान संबंध सुधारने की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि अगर वो इस काम को करने में सफल हो जाते हैं तो मान लेंगे कि उन्होंने अपनी ज़िम्मेदारी बखूबी निभाई है. उन्होंने कहा, ''अगर मैं भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को सामान्य करने में कामयाब होता हूं तो मैं मानूंगा कि मैंने अपनी ज़िम्मेदारी पूरी कर दी.''

हाल ही में मनमोहन सिंह ने मोहाली में होने वाले विश्व कप सेमी फ़ाइनल मुकाबले के लिए पाकिस्तान के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भारत आने का न्योता दिया था. पाक प्रधानमंत्री ने इस निमंत्रण को स्वीकार करते हुए मोहाली में मनमोहन सिंह के साथ सेमी फ़ाइनल मैच देखा था. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, तेज़ी से विकास कर रहे पाँच देशों के समूह (ब्रिक्स) की बैठक में हिस्सा लेने के बाद चीन और कज़ाकस्तान की यात्रा से लौटते हुए अपने विशेष विमान में संवाददाताओं को संबोधित कर रहे थे.

अगर मैं भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को सामान्य करने में कामयाब होता हूं तो मैं मानूंगा कि मैंने अपनी ज़िम्मेदारी पूरी कर दी. इस दौरान उन्होंने परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल को लेकर अपनी सहमति भी ज़ाहिर की. जापान में आए भीषण भूकंप और सूनामी के बाद परमाणु संयंत्रों को हुए नुकसान से पूरी दुनिया में परमाणु ऊर्जा को लेकर नई बहस छिड़ गई है. हालांकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जापान के परमाणु संयंत्र में हुए विकिरण के बावजूद ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल की मंशा ज़ाहिर की. उन्होंने कहा कि भले ही दुनियाभर में परमाणु ऊर्जा की सुरक्षा को लेकर चिताएं बढ़ी हों लेकिन ठंडे दिमाग से जब इस विषय में विचार किया जाएगा की कोयले और कार्बन से मिल रही ऊर्जा के क्या फ़ायदे और नुकसान हैं तो निश्चित ही परमाणु ऊर्जा को तरजीह दी जाएगी. इस दौरान चीन के प्रधानमंत्री हू ज़िंताओ के साथ अपनी बातचीत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में भारत और चीन के संबंधों में मधुरता दिखाई देगी. दोनों देशों के बीच सीमाओं पर शांति और सदभाव बनाए रखने के लिए नई रणनीति बनाई जा रही है

कोई टिप्पणी नहीं: