ब्रिक (ब्राजील, रूस, भारत, द. अफ्रीका और चीन) देशों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन मंगलवार को चीन के सान्या शहर पहुंचे हैं। इस सम्मेलन में ब्रिक देश इन दिनों खाड़ी और उत्तरी अफ्रीकी देशों में राजनीतिक उथल-पुथल और खून-खराबे पर भी चर्चा करेंगे। ब्रिक देश ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसे मामलों पर आपसी सहयोग बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श करेंगे। अपनी पांच वर्षीय यात्रा पर पहले तीन दिन मनमोहन चीन में रहेंगे और उसके बाद कजाकिस्तान की यात्रा पर जाएंगे।
अपनी यात्रा से पहले मनमोहन सिंह ने कहा कि आर्थिक विकास के पारंपरिक स्रोत दबाव में हैं। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में इस समय फैली अनिश्चितता चिंता की बात है। ब्रिक सम्मेलन में इन पर चर्चा की जाएगी। सम्मेलन में लीबिया सहित सभी खाड़ी देशों में मची उथल-पुथल पर चर्चा की जाएगी। सान्या में प्रधानमंत्री चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ, रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव, ब्राजील के राष्ट्रपति दिल्मा रौसेफ और दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति जैकब जुमा से द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक देश वैश्विक अर्थव्यवस्था और आर्थिक सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मनमोहन सिंह के साथ चीनी राष्ट्रपति जू जिंताओ की मुलाकात से एक दिन पहले चीन ने कहा है कि वह जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश नागरिकों को नत्थी वीजा देने पर भारत की आपत्ति पर बातचीत करने को तैयार है। बीजिंग में संवाददाताओं के सवालों के जवाब में चीन के विदेश मंत्रालय के अधिकारी होंग ली ने कहा कि नागरिकों के आवागमन से जुड़े सभी विवादित मुद्दों पर चीन बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि नत्थी वीजा और रक्षा संबंध बहाल करने के मसले पर भी चीन बात करेगा। होंग ने कहा कि चीन भारत के साथ सौहार्दपूर्ण संबंधों के लिए मिलकर काम करना चाहता है। द्विपक्षीय संबंधों में सभी मुद्दों पर वे बातचीत को तैयार हैं। मालूम हो कि जम्मू-कश्मीर के चार पत्रकारों को चीन ने सामान्य भारतीय वीजा जारी किया है।
भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल बीएस जसवाल को वीजा देने से इनकार करने के बाद भारत ने पिछले साल चीन के साथ रक्षा संबंध तोड़ लिए थे। जसवाल जम्मू-कश्मीर में भारत सेना का नेतृत्व कर चुके हैं।

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