नोएडा के सेक्टर-29 में रहने वाली अनुराधा और सोनाली अपने ही घर में 7 महीने से बंद थीं जिनमे से एक की बुधवार सुबह मृत्यु हो गई। पुलिस ने मंगलवार को इन दोनों लड़कियों को उनके घर से बाहर निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया था। रेज़ीडेंट वेल्फेयर एसोसिएशन ने कुछ दिन पहले पुलिस को शिकायत दर्ज कराई थी कि सेक्टर 29 के फ्लैट नंबर 326 में रहने वालों का अता-पता नहीं है क्योंकि कोई बाहर नहीं निकलता पर आवाज अकसर सुनी जा सकती है।
अनुराधा और सोनाली दो बहनों ने भाई के करियर के लिए अपने बारे में कभी नहीं सोचा, लेकिन इसके बदले में उन्हें खुद को घर में कैद करना पड़ा। पिता की मौत से इनका पहले 5 लोगों का हंसता-खेलता परिवार था। पहले पिता और फिर मां की मौत हो गई। इतने बड़े सदमे से दोनों बहनें किसी तरह उबरीं। दोनों ने छोटे भाई को कभी माता-पिता की कमी का अहसास नहीं होने दिया। बहनों ने 4 साल पहले छोटे भाई की धूमधाम से शादी की थी। इसके बाद दोनों बहनों ने घर के बाहर का उजाला नहीं देखा।
रिटायर्ड कर्नल ओमप्रकाश बहल का परिवार दिल्ली में रहता था। परिवार के सभी लोगों का आपस में बहुत प्यार था। सभी एक-दूसरे की खुशियों का पूरा ख्याल रखते थे। बात 1992 की है। फौजियों के यूनियन की आगरा में मीटिंग थी। उसी मीटिंग के सिलसिले में बहल आगरा गए। मीटिंग के बाद वह स्कूटर से जा रहे थे। इसी दौरान सड़क हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। वह काफी दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहे, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। रिटायर्ड कर्नल की मौत से पूरा परिवार सदमे में आ गया। खासतौर पर उनकी पत्नी की हालत खराब हो गई। उनकी बड़ी बेटी अनुराधा और छोटी सोनाली उन्हें संभालती थीं। आखिरकार, 1995 में रिटायर्ड कर्नल की पत्नी की भी मौत हो गई। इसके बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी अनुराधा के कंधों पर आ गई। वह छोटी बहन और भाई का सहारा बन गईं।
दिल्ली में रहने के दौरान उन्हें लगा कि घर शुभ नहीं है। लिहाजा, 1997 में वे नोएडा सेक्टर-29 रहने आ गए। दोनों बहनों का अपने भाई से इतना प्यार था कि उन्होंने फ्लैट विपिन के नाम पर खरीदा था। यहां आने के बाद अनुराधा सीए की नौकरी करने लगी थीं। छोटी बहन भी नौकरी की तलाश में थी। भाई विपिन पढ़ाई कर रहा था। जब ये लोग नोएडा में रहने लगे, तब पड़ोस के लोग भी इनसे काफी घुल मिल गए। बहनों ने छोटे भाई की 2007 में धूमधाम से शादी करा दी। दोनों बहनों के भाई की पत्नी से अक्सर झगड़े होने लगे। एक साल बाद मामले ने काफी तूल पकड़ लिया। नौबत यहां तक आ गई कि घर में बहनें रहेंगी या फिर भाई का परिवार। इससे दोनों बहनों का परिवार को एकसाथ रखने का सपना टूटने लगा। इसके बाद अनुराधा डिप्रेशन में चली गईं। 2009 में भाई इनसे अलग रहने लगा। पिता और मां की मौत से उबरने के बाद जब प्यारा भाई अलग रहने लगा, तो दोनों बहनें परेशान हो गईं। भाई के दूर जाने के बाद दोनों का अगर किसी से लगाव था तो वह उनकी डॉगी थी। अनुराधा ने प्यार से उसका नाम छोटी रखा था। घर में आने के बाद दोनों बहनें छोटी डॉगी से ही मन बहलाती थीं। जुलाई 2009 में छोटी ने भी साथ छोड़ दिया। छोटी की मौत के बाद भी उसे अपने साथ रखा। बदबू बढ़ने लगी, तब उसे बाहर किया गया।

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