इस बार बॉलीवुड के पुरस्कार समारोह आईफ़ा में राज कपूर रेट्रोस्पेक्टिव आयोजित किया जा रहा है. जिसमें राज कपूर के हिंदी सिनेमा में महान योगदान को याद किया जाएगा. उसी के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में रणधीर कपूर ने कहा ."आग, आवारा, श्री 420, जागते रहो और जिस देश में गंगा रहती है जैसी तमाम महान फ़िल्में बना चुके राज कपूर को ख़ुद मेरा नाम जोकर सबसे ज़्यादा पसंद थी".
उन्होंने कहा "मेरा नाम जोकर मेरे पिता के दिल के सबसे नज़दीक थी. उन्होंने इसे बहुत ही शिद्दत और जुनून से बनाया था. लेकिन जब फ़िल्म नहीं चली तो उनका दिल ही टूट गया. रणधीर कपूर ने ये भी बताया कि बाद में यह फ़िल्म जब दोबारा रिलीज़ हुई तो अच्छी ख़ासी चली.
रणधीर कपूर ने कहा "मेरा नाम जोकर अभी तक आरके फ़िल्म्स के लिए सबसे ज़्यादा मुनाफ़े का सौदा साबित साबित हुई. अब भी इसके टीवी राइट्स बेचने पर हमें सबसे ज़्यादा पैसा मिलता है. रणधीर कपूर के मुताबिक़ राज कपूर का निधन हुए 22 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी लोग उन्हें भूले नहीं है.
रणधीर अपने पिता की फ़िल्मों का रीमेक बनाने के पक्ष में नहीं हैं. वो कहते हैं, "मुझे कई लोग कहते हैं कि आवारा का रीमेक बनाओ. लेकिन भला ऐसा कैसे हो सकता है. आप वो राज कपूर कहां से लाओगे. वो पृथ्वीराज कपूर कहां से लाओगे. वो नरगिस दत्त कहां से लाओगे. शंकर-जयकिशन, शैलेंद्र और हसरत जयपुरी जैसे महान लोग कहां से लाओगे." रणधीर कपूर अपने पिता की ब्लैक एंड व्हाइट फ़िल्मों को रंगीन करने के पक्ष में भी नहीं हैं.
इस मौके पर रणधीर कपूर के छोटे भाई ऋषि कपूर भी मौजूद थे. उन्होंने राज कपूर के निर्देशन में बॉबी और प्रेम रोग जैसी कामयाब फ़िल्मों में काम किया है. अपने पिता को याद करते हुए ऋषि कहते हैं, "सेट पर हमारा रिश्ता पिता-पुत्र का नहीं बल्कि निर्देशक और कलाकार का होता था. मैं उन्हें राज साहब कह कर बुलाता था और वो भी मुझे मेरे नाम से बुलाते थे." ऋषि कपूर ने बताया कि वो पिछले दिनों उज्बेकिस्तान गए थे, जहां काफ़ी सारे युवाओं ने उनसे करीना और रणबीर कपूर के बारे में बात ना करके राज कपूर के बारे में पूछा. ऋषि कपूर कहते हैं, "अच्छा लगता है कि अब भी लोग मेरे पिता को याद रखते हैं.

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