खून में चीनी की मात्रा को काबू में रखने के लिए योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा सुझाए गए लौकी और करेले का रस क्या वाकई असरदार होता है? अब इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) इस बात की जांच करेगा कि क्या लौकी और करेले के रस से खून में चीनी के स्तर में कमी आती है। इस रिसर्च के लिए आईसीएमआर ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह समिति इस बात का पता लगाएगी कि क्या लौकी का रस पीना स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है।
आईसीएमआर से कई डॉक्टरों ने यह शिकायत की है कि लौकी का रस पीने से सेहत पर बुरा असर पड़ता है। गौरतलब है कि गुड़गांव और दिल्ली में पिछले साल लौकी का रस पीने से दो लोगों की मौत हो गई थी।
पिछले साल काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के 59 साल के उप सचिव की मौत लौकी का रस पीने से हुई थी। उप सचिव की मौत लौकी और करेले के एक गिलास रस पीने से हुई थी। वहीं, जून, 2010 में मधुमेह से पीड़ित सुशील कुमार सक्सेना की एक अस्पताल में खून की उलटी करने के बाद मौत हो गई थी। उन्होंने भी लौकी का रस पिया था।

2 टिप्पणियां:
ठीक बात है. जांज क्यों न हो ही जाए
बड़ी देर से जागे.
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