पिछले साल दिल्ली में कॉमनवेल्थ खेल के आयोजन के दौरान घोटाला के आरोप में सोमवार को आयोजन समिति के अध्यक्ष रहे सुरेश कलमाड़ी की गिरफ्तारी हो गई है। सीबीआई ने कलमाड़ी के खिलाफ नए सुबूत मिलने के बाद पहले पूछताछ की और फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई की प्रवक्ता ने पत्रकारों को बताया कि कलमाड़ी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें कल (मंगलवार) को पटियाला हाउस स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) भी कलमाड़ी पर कार्रवाई कर सकती है। वह वर्षों से भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) के अध्यक्ष हैं, लेकिन अब गिरफ्तारी के बाद इस पद से उनकी छुट्टी हो सकती है। खेल मंत्री अजय माकन का भी कहना है कि कलमाड़ी की गिरफ्तारी के बाद आईओसी से आईओए अध्यक्ष बदलने की सिफारिश की जाएगी। कलमाड़ी की गिरफ्तारी एएम फिल्म्स और टीएसआर को दिए गए करार में नियमों की अनदेखी करने के लिए हुई है। एएम फिल्म्स के मालिक आशीष पटेल से हुई लंबी पूछताछ के बाद जांच एजेंसी के हाथ कुछ ऐसे सबूत लगे हैं जिसके आधार पर सीबीआई ने कलमाड़ी से पूछताछ किया और फिर गिरफ्तारी की।
आरोप है कि कलमाड़ी ने करार आवंटित कराने के लिए नीलामी प्रक्रिया तो अपनाई, लेकिन एएम फिल्म्स के अलावा ज्यादातर फर्जी पार्टियों से बोली लगवाई और अंतत: करार एएम फिल्म्स को दे दिया गया। कलमाड़ी के एक पूर्व सहयोगी ने सीबीआई के सामने कबूला था कि बोली लगाने वाले अन्य लोग नीलामी में शामिल होने की काबिलियत पूरी नहीं करते थे। कॉमनवेल्थ घोटाले की जांच करने वाली शुंगलू समिति ने भी कलमाड़ी को काम में देरी के लिए दोषी ठहराया है। समिति ने कैटरिंग का ठेका रद किए जाने पर भी सवाल उठाया है। शुंगलु कमेटी ने कॉमनवेल्थ घोटाले पर अपनी रिपोर्ट हाल ही में कैबिनेट सेक्रेटरी को सौंपी है। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में बताया गया है कि करीब 900 करोड़ रुपए का नुकसान आर्गनाइजिंग कमेटी की वजह से हुआ।
भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन ने 2003 में जब कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन का अधिकार हासिल किया था, तब एसोसिएशन ने 1,620 करोड़ रुपये के बजट खर्च का अंदाजा लगाया था। लेकिन 2010 तक आते-आते यह बजट करीब 11,500 करोड़ तक पहुंच गया। इसमें दिल्ली के विकास और सौंदर्यीकरण का बजट शामिल नहीं है। जानकार मानते हैं कि इस खेल के आयोजन और इससे जुड़े सौंदर्यीकरण पर करीब 70 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसमें दिल्ली में होने वाले विकास कार्य भी शामिल हैं। माना जाता है कि इस राशि में ज़्यादातर रकम घपले-घोटाले की भेंट चढ़ गई। जांच जारी

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