सिद्धार्थ मुखर्जी प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किये जाने वाले भारतीय मूल के चौथे विजेता बन गये हैं। सबसे पहले 1937 में गोविंद बिहारी लाल को यह पुरस्कार प्रदान किया गया था। इसके अलावा झुंपा लाहिड़ी और गीता आंनद भी इस सूची में शामिल हैं।श्री मुखेर्जी को यह पुरस्कार उनकी पुस्तक "बायोग्राफी ऑफ कैंसर" के लिए दी गयी है। दिल्ली में पैदा हुए मुखर्जी की यह पुस्तक दुनिया भर में सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तक बन गई है।
कोलम्बिया युनिवर्सिटी में चिकित्सा विज्ञान के सहायक प्रोफेसर और कोलम्बिया युनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में कैंसर के चिकित्सक मुखर्जी ने आईएएनएस को पिछले वर्ष दिसम्बर में बताया था, "दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में कैंसर आश्चर्यजनक रूप से बढ़ रहा है।" मुखर्जी ने भारत में कैंसर के बढ़ रहे मामलों से निपटने के लिए धूम्रपान निरोधी एक मजबूत अभियान और स्तन कैंसर जांच की वकालत की है।
प्रकाशन के एक महीने बाद ही मुखर्जी की इस पुस्तक को न्यूयार्क टाइम्स के पुस्तक समीक्षा कालम में 2010 की 10 सर्वश्रेष्ठ पुस्तकों में शामिल किया गया था। मुखर्जी ने युवा पुरुषों व महिलाओं में बढ़ रही धूम्रपान की प्रवृत्ति को कैंसर में वृद्धि का एक कारण बताया है। उन्होंने कहा, "लेकिन इसके अन्य कारण भी हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है और अन्य बीमारियां धीरे-धीरे गायब होने लगती है, कैंसर का आगमन शुरू हो जाता है।" मुखर्जी (40) नई दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव में पले-बढ़े हैं और उन्होंने कोलम्बो स्कूल से अपनी पढाई की।

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