रामदेव और स्‍वामी अग्निवेश के बीच मतभेद. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 9 अप्रैल 2011

रामदेव और स्‍वामी अग्निवेश के बीच मतभेद.

जन लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने के लिए गठित संयुक्‍त समिति में शामिल सिविल सोसायटी के सदस्‍यों को लेकर योग गुरु बाबा रामदेव और स्‍वामी अग्निवेश के बीच मतभेद सामने आ गए हैं। भ्रष्‍टाचार के खिलाफ देशव्‍यापी स्‍वाभिमान यात्रा निकाल चुके और अन्‍ना की मुहिम का समर्थन करने वाले रामदेव ने इस बात का विरोध किया था कि मसौदा तैयार करने वाली समिति में शांति भूषण और प्रशांत भूषण (दोनों पिता-पुत्र हैं) नहीं हो सकते। वहीं अन्‍ना की मुहिम के सहयोगी और सरकार से बातचीत में शामिल रहे अग्निवेश ने इसे महज संयोग करार दिया है।

सरकार की ओर से आज बिल का मसौदा तैयार करने वाली संयु‍क्‍त समिति गठित किए जाने की अधिसूचना जारी की गई जिसके बाद अन्‍ना हजारे ने 97 घंटे से जारी आमरण अनशन तोड़ दिया। मसौदा समिति के सदस्यों में सरकार की ओर से प्रणब मुखर्जी, केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली, कपिल सिब्बल, पी चिदंबरम और सलमान खुर्शीद शामिल हैं जबकि सिविल सोसाइटी की ओर से पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण, सीनियर वकील प्रशांत भूषण, सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज संतोष हेगड़े, सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल और अन्ना हजारे शामिल हैं। 'परिवर्तन' नाम से एनजीओ चलाने वाले आरटीआई कार्यकर्ता अरविंद अन्ना के नंबर एक सिपहसालार हैं। वित्‍त मंत्री प्रणब मुखर्जी इस समिति के अध्‍यक्ष और शांति भूषण सह-अध्‍यक्ष होंगे।

पैनल में शामिल प्रशांत भूषण शांति भूषण के बेटे हैं। रामदेव ने पहले इस बात का विरोध किया था कि पिता और बेटे दोनों ही एक साथ पैनल में शामिल नहीं हो सकते। रामदेव शुक्रवार को अन्‍ना हजारे की मुहिम का समर्थन करने जंतर मंतर भी पहुंचे थे। हालांकि अग्निवेश ने कहा कि शांति भूषण और प्रशांत भूषण का पैनल में शामिल होना एक संयोग मात्र है। हमने दो बेहतरीन वकीलों को सिविल सोसायटी का नुमाइंदा बनाया है। यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि शुक्रवार को जंतर -मंतर पर मौजूद पत्रकारों ने जब खुद अन्‍ना हजारे से यह सवाल किया कि सिविल सोसायटी के किन प्रतिनिधियों को मसौदा समिति में जगह मिल सकती है तो उन्‍होंने यह कहा था कि हम लोग इस बारे में आपस में विचार विमर्श कर तय कर लेंगे। सोशल वेबसाइट्स पर भी पैनल में सिविल सोसायटी के सदस्‍यों के चयन को लेकर तीखी बहस चल रही है।

भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे गांधीवादी और जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता अन्‍ना हजारे का 97 घंटे से अधिक का उपवास शनिवार को खत्‍म हो गया। अन्‍ना हजारे ने जन लोकपाल बिल पर सरकार की रजामंदी को देश की जनता की जीत करार दिया है। हालांकि उन्‍होंने कहा कि यह ‘आजादी की दूसरी लड़ाई’ की शुरुआत भर है और आगे अभी लंबा सफर तय करना है। मंगलवार को राजधानी स्थित जंतर मंतर पर शुरू किया गया आमरण अनशन खत्‍म करने के बाद देश को संबोधित करते हुए अन्‍ना हजारे ने कहा कि लोकपाल बिल के मसौदे से जुड़ा शासनादेश जारी होने के बाद उनकी जिम्‍मेदारियां और बढ़ गई हैं। उन्‍होंने भ्रष्‍टाचार के खिलाफ अपनी ‘लड़ाई’ का तीन सूत्रीय मसौदा पेश करते हुए कहा है कि पहली सफलता जन लोकपाल बिल पर सरकार का राजी होना है लेकिन इसके बाद यह मसौदा मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा और जरूरत पड़ी तो उस वक्‍त भी अभियान चलाया जाएगा। उन्‍होंने आगे कहा कि यदि इस बिल को पारित करने को लेकर संसद में कोई अड़ंगा आया तो भी उन्‍हें देशवासियों के साथ मिलकर अभियान चलाने की जरूरत पड़ेगी।

अन्‍ना ने कहा कि अगर 15 अगस्त तक सरकार ने लोकपाल बिल पारित नहीं किया तो हम फिर से आंदोलन करेंगे। उन्‍होंने कहा, ‘लोकपाल बिल पारित होने के बाद भ्रष्‍टाचार को रोकने के लिए सरकार पर इस बात के लिए दबाव डालने की जरूरत होगी कि सत्‍ता का विकेंद्रीकरण किया जाए।’ उन्‍होंने ग्राम सभाओं, नगर परिषदों, नगरपालिकाओं के जनप्रतिनिधियों को वापस बुलाने के अधिकार (राइट टू रिकॉल) की भी वकालत की। उन्‍होंने कहा कि यदि सरपंच या उप सरपंच जनता से बिना पूछे पैसा खर्च करते हैं तो उसे वापस बुलाने का अधिकार जनता के पास होना चाहिए जो उन्‍हें चुनती है।

चुनाव व्‍यवस्‍था में बदलाव की मांग करते हुए अन्‍ना हजारे ने कहा कि इलेक्‍ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में गड़बड़ी होने की शिकायतें सामने आती रही हैं, इसे दुरुस्‍त किया जाना चाहिए। उन्‍होंने भरोसा दिलाया कि ईवीएम की गड़बड़ी ठीक करने की उनकी पेशकश सरकार ने मान ली है। अन्‍ना हजारे ने ‘नापसंद का अधिकार’ की भी वकालत की। उन्‍होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में चुनाव लड़ रहे सभी उम्‍मीदवार दागी हैं तो जनता के पास यह विकल्‍प होना चाहिए कि वो इनमें से किसी को भी ना चुने और वहां का चुनाव रद्द कर फिर से चुनाव कराए जाएं। अन्‍ना ने शनिवार सुबह साढ़े दस बजे जंतर मंतर स्थित मंच पर सबसे पहले 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे लगाए। वहां मौजूद बड़ी संख्‍या में लोगों ने भी अन्‍ना के सुर में सुर मिलाए। अन्‍ना ने वहां मौजूद लोगों को इस आंदोलन की सफलता की बधाई देते कहा, 'आज हमारी जो जीत हुई, आपके चलते हुई। हमारी लड़ाई अभी खत्‍म नहीं हुई। हमारे राजनेता अब भी नहीं मानेंगे तो लड़ाई फिर से शुरू होगी। हम मिलते रहेंगे। इस आंदोलन में युवाओं का साथ आना आशा की किरण जगाता है। हमने काले अंग्रेजों की नींद उड़ा दी है।' अन्‍ना और उनके समर्थकों ने इसे जनता की जीत करार दिया है।

73 साल के अन्‍ना ने धरना स्‍थल पर अनशन पर बैठे अन्‍य लोगों को पहले जूस पिलाया, इसके बाद खुद एक बच्‍ची के हाथों नींबू पानी पीकर अपना उपवास तोड़ा। अन्‍ना के उपवास तोड़ने के साथ ही धरना स्‍थल के साथ साथ पूरे देश में जश्‍न का माहौल पैदा हो गया है। प्रदर्शन स्‍थल पर बीच-बीच में ‘अन्‍ना हजारे जिंदाबाद’ , ‘अन्‍ना तुम संघर्ष करो हम तुम्‍हारे साथ हैं’ के नारे सुनाई दिए। मंच पर मौजूद कई कलाकारों ने 'रघुपति राघव राजा राम...' की धुन छेड़ी। सुबह करीब साढ़े नौ बजे सरकार की ओर से सीनियर कैबिनट मंत्री प्रणब मुखर्जी की अगुवाई में संयुक्‍त समिति गठित किए जाने की अधिसूचना जारी की गई जो एक प्रभावी लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करेगी। मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्‍बल ने इस अधिसूचना की कॉपी अन्‍ना की इस मुहिम से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता स्‍वामी अग्निवेश को सौंपी गई। अग्निवेश इस कॉपी को लेकर जंतर मंतर पहुंचे और वहां मंच से इसकी अधिसूचना की प्रति मीडिया के जरिये पूरे देश को दिखाई गई। स्‍वामी अग्निवेश ने कहा, ‘हमने सरकार से इस बारे में शासनादेश मांगा था लेकिन सरकार ने एक कदम आगे बढ़ते हुए अधिसूचना जारी कर दी है।’ अन्‍ना के सहयोगियों में शामिल पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने इसे 'आत्‍म सम्‍मान' की जीत करार दिया है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लोकपाल बिल मुद्दे पर सरकार और सिविल सोसाइटी के गठबंधन को लोकतंत्र के लिए एक शुभ संकेत मानते हुए कहा कि सरकार इस ऐतिहासिक कानून को संसद के मानसून सत्र में लाने पर विचार कर रही है। मनमोहन सिंह ने शनिवार को जारी बयान में कहा, 'मुझे इस बात की खुशी है कि सरकार और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि भ्रष्टाचार को खत्म करने के मुद्दे पर एकजुट हैं। मुझे इस बात की भी खुशी है कि अन्ना हजारे अपना उपवास खत्म करने के लिए मान गए हैं।'

भ्रष्टाचार को सबके लिए एक अभिशाप बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक कानून को लेकर सिविल सोसाइटी और सरकार का हाथ मिलाना लोकतंत्र के लिए एक शुभ संकेत है। सरकार और हजारे के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत को सफल बताते हुए उन्होनें उम्मीद जताई कि इस कानून को तैयार करने की प्रक्रिया सही तरीके से आगे बढ़ेगी जिससे कि सभी संबंधित पक्षों से सलाह लेने के बाद यह कानून कैबिनेट के समक्ष मानसून सत्र के दौरान रखा जा सके

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