
आज कल महाराष्ट्र के मराठवाडा में भ्रमण पर हूँ.मराठवाडा के पास के अन्ना ने पुरे देश में क्रांति की लहर फैलाई है सो जाहिर है अन्ना का अनशन और अन्ना का घर संबंधों के बयार को ढूंढते ढूंढते नगर (अहमदनगर) जा पहुंचा. अन्ना की जीवनी और अन्ना के अपने जीवन में किये गए आन्दोलन के बारे में तो बहुत कुछ पता है और जो नहीं था उसे अंतरजाल से समेटने की कोशिश की मगर हम क्या हैं कैसे हैं और क्या चाहते हैं कि जानकारी हमारे घर वाले से बेहतर कोई नहीं दे सकता के सिद्धांत पर चलते हुए अहमद नगर के अन्ना को अहमद नगर में ढूंढने की कोशिश की.
सबसे पहले टपरी वाले चाय कि दूकान पर जो आम गरीब लोगों का वास्तविक ठिकाना होता है. दूकानदार और बैठे चाय कि चुस्की लेते कुछ मजदूर. प्रश्न था कि आप लोगों ने आना के समर्थन में क्या किया है जबकि आना ने पुरे देश को समेत कर जंतर मंतर पर एक कर दिया है. उत्तर चौंकाने वाला था. साहब अन्ना हजारे के पास कुछ नहीं है न घर न ठिकाना मगर अन्ना का क्या है इसके लिए तो आपको अहमद नगर के हाई वे पर उन सैकड़ों एकड़ जमीन के बारे में पता लगा होगा जो अन्ना के नाम से ना होकर भी अन्ना का है. अपने आप को गरीब कहता है ये अन्ना मगर हमारे इलाके का सबसे बड़ा जमींदार है.
विचरों में उलझा चाय के बाद सिगरेट की तलब में पान पट्टी पर पहुंचा. एक सिगरेट ली और सुलगाते हुए वही प्रश्न दुहरा दिया टपरी वाले और आस पास के लोगों से. इस बार जवाब सन्न कर गया. जवाब : साहेब क्या करना है रहने दीजिये इन सब बातों का कोई मतलब नहीं है. बाबा राम देव और अन्ना हजारे में एक बड़ी समानता है. अन्ना और बाबा दोनों भ्रष्टाचार के लिए लड़ने का आवाहन करते हैं. अन्ना और बाबा दोनों के पास अपने नाम से कोई संपत्ति नहीं है दोनों फक्कड़ हैं मगर क्या वाकई में दोनों फक्कड़ हैं.
जवाब ने चौंकाया क्यूंकि हम सब अन्ना को फक्कड़ ही तो मानते और जानते हैं तो फिर ये अन्ना के घर का आदमी क्या कह रहा है?
शाम को नाइ के यहाँ था वैसे दाढ़ी में खुद बनाता हूँ मगर लोगों के विचारों से अवगत होने के लिए आपको लोगों के बीच जा कर उनसे बातचीत तो करनी ही होती है सो बस पहुँच गया अपनी हजामत बनवाने. नाइ से लेकर नाइ के ग्राहक तक से वही सवाल उत्तर ने अन्ना की हजामत बना दी.
आखिर ये विपरीत धारा अन्ना के घर में क्यूँ ?

---रजनीश के झा---
सम्पादक (आर्यावर्त)
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