ब्रिक्स देशों के विकास बैंकों ने अपनी मुद्राओं में एक दूसरे को कर्ज मुहैया कराने के करार पर दस्तखत किए। ब्रिक्स ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए भारत की दावेदारी के प्रति समर्थन भी जताया है। गुरुवार को ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन तथा द. अफ्रीका) का संयुक्त घोषणा पत्र भी जारी हुआ।
दुनिया में तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के फोरम-ब्रिक्स के सदस्य देश एक-दूसरे को डॉलर के बजाय अपनी मुद्राओं में कर्ज और अनुदान के लेनदेन पर सहमत हो गए हैं। ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन तथा दक्षिण अफ्रीका) शिखर सम्मेलन के दौरान गुरुवार को पांचों देशों के प्राधिकृत बैंकों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत ये देश एक-दूसरे को स्थानीय मुद्रा में कर्ज और अनुदान देने के साथ दूसरे वित्तीय मामलों में भी सहयोग करेंगे। इन देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सीट के लिए भारत की दावेदारी के प्रति समर्थन भी जताया है। शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, ‘हमारे पास सतत और संतुलित विकास को ठोस, सार्थक तथा विकास का नया मॉडल देने का अच्छा अवसर है। भारत इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ब्रिक्स देशों के साथ है।’
गुरुवार को ब्रिक्स का संयुक्त घोषणा पत्र जारी हुआ। इस पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ, रूस के राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव, ब्राजील की राष्ट्रपति दिल्मा राउसेफ तथा दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा के हस्ताक्षर हैं। इसे ‘सान्या डिक्लेरेशन’ का नाम दिया गया है। घोषणा पत्र में कहा गया है, ‘हम संयुक्त राष्ट्र में इसकी सुरक्षा परिषद समेत समग्र सुधारों की जरूरत की पुष्टि करते हैं। ऐसा करना आज की दुनिया की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करने के लिए जरूरी है।’
ब्रिक्स नेताओं ने कहा कि हाल के वित्तीय संकट ने डॉलर पर निर्भर मौजूदा मौद्रिक व्यवस्था की कमियां उजागर की हैं। इस वक्त व्यापक आधार वाली अंतरराष्ट्रीय आरक्षित मौद्रिक व्यवस्था लाने की जरुरत है। पांचों ब्रिक्स देशों के विकास बैंकों ने डॉलर की बजाय अपनी-अपनी मुद्राओं में एक दूसरे को कर्ज मुहैया कराने के करार पर दस्तखत किए। जापान में परमाणु खतरों के मद्देनजर ब्रिक्स देशों ने परमाणु संयंत्रों को लेकर सुरक्षा नियम कड़ाई से लागू करने की जरूरत बताई। आपसी सहायता का प्रस्ताव रखा गया। इस बात की पुष्टि भी की गई कि जापान में दुर्घटना के बावजूद परमाणु उर्जा विकसित किया जाना एक जरूरत है।
रूस और चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य हैं। साथ ही वे ब्रिक्स से भी जुड़े हुए हैं। इन्होंने संयुक्त घोषणा पत्र में कहा कि वे संयुक्त राष्ट्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उन देशों (भारत, ब्राजील तथा दक्षिण अफ्रीका) की आकांक्षाओं का समर्थन करते हैं। ये तीनों देश अपने बढ़ते वैश्विक प्रभाव के मद्देनजर परिषद में स्थाई सीट चाहते हैं।

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